यदि मैं प्रधानमंत्री होता पर निबंध (yadi main pradhanmantri hota nibandh)

प्रस्तावना

अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री बनता तो अपने सुंदर व प्यारे देश के गौरव ओर सम्मान को बरकरार रखने के लिए कई प्रकार के योजनाएं बनाता। हालाँकि हमारी पार्टी के बहुत लोगों की अलग अलग रायसे ही ये योजनाएं की सफल होने के आसार हैं।

इसी कारणवश मैं सबसे पहले ये प्रयत्न करने की कोशिश करता, जिससे हमारी पार्टी कई प्रकार के मत से कार्यक्रमों तथा लोगों के हित के लिए उनके प्रयोजन व मकसद में  सहायता करता।

लोकहित के काम

अपनी पार्टी का हर तरह से सभी का मत हासिल हो जाने के बाद में प्रधानमंत्री पद को प्राप्त करता। उसके बाद उन सभी कार्यों को पूर्ण करने की कोशिश करता जो विफल हो गए थे इससे पहले किन्ही कारणवस।

ये कार्य हैं- उन कार्यक्रमों को चालू कराना जो जनता के हित मे हो, भिन्न-भिन्न प्रकार के योजनाओं व क्रियाकलापों की तह तक जाता जो लोगों के फायदे में सहायता करेंगे और लोकहित के कार्य कम करके शून्य कर सके और अनेक कार्य की पूर्ति के लिए दिन रात प्रयत्न करता।

देश की रक्षा शक्ति को और ठोस करना

महान कार्य में कभी भी पीछे नहीं हटता जो अपने देश के नागरिकों की हालात को ठीक करने के उद्देश्य से कार्य करता है। पर, ऐसे बहुत से ऐसे कार्य भी हैं, जो देश को सुरक्षित रखते है।

अपने देश के उन्नति व प्रगति के लिए समस्त लोगों को सुखी व आनंद से अपने जीवन का निर्वाह करने देता, जिसके किये महत्वपूर्ण हैं कुछ कार्य – जैसे सम्पूर्ण क्षमता से अपने देश को सुरक्षित हाथों में रखने की प्रयत्न हेतु जल सेना, थल सेना और वायु सेना को सभी प्रकार के साधनों के साथ तैनात करना, जिससे हमारे देश की सुख व समृद्धि में कोई कमी नही आती।

योजनाओं को जल्दी प्रयुक्त करवाना

मैं भूल कर भी ऐसी गलती न करता कि युद्ध व लड़ाई अथवा संग्राम में जीते हुए ज़मीन अपने विरोधी को सौंप दें।

हमारे विरोधी और शत्रु हमेशा हमें नुकसान पहुंचाने का प्रयत्न करते रहते हैं। अतः हमारे देश के शत्रु के ऊपर दया दिखाना काफी घातक है।

इसी कारणवश हम पे हमला करने वाले शत्रु को हराकर मैं उस पूरे जगह को फिर से लेने की कोशिश करता और अपने देश का हिस्सा बनाता जिसे शत्रु ने हमसे छीन लिया था।

बेरोजगारी को मिटाना और शिक्षा का विकास 

हमारे देश में आज बेरोजगारी इतनी ज्यादा हो गयी है की, कानून और हालात हर तरह से बिगड़ती जा रही है। महंगाई का स्तर भी काफी बढ़ गया है।

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रिश्वत खोरी, भ्रष्टाचार, बुरा आचरण, जाती व्यक्ति के समाज, अपराध आदि चरम स्तर पर पहुंच रहे हैं। राजनीति के अंतर्गत हुए अपराधों व जातिवादी के विक्षिप्त में उलझ सी गई है।

ऐसे हालात में देश में पुनर्जागरण की काफी ज़रूरत है। इसी कारण मैं खूब परिश्रम करके इन गंदगी और बुराइयों को देश से मिटाने के प्रयत्न जरूर करता। इस बात से कोई इनकार नहीं कि शिक्षा के बग़ैर एक सही गणतन्त्र सफल नहीं हो सकता।

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