रूपये की आत्मकथा पर लघु निबंध (Short Essay on Rupaye Ki Atmkatha in Hindi)

प्रस्तावना

समस्त लोग मुझे रुपये के नाम से जानते है। मेरी जगह कुबेर के खजाने में स्थित होती है। इसलिए लोग मुझे देवता कुबेर के नाम से जानते हैं।

कुछ व्यक्ति मुझे लक्ष्मी भी कहते हैं। वैसे तो मेरा रूप एक ही है, परन्तु मुझे कई नामों से जानते हैं जैसे रुबल, येन, लारा, मार्क, दीनार, रुपया, डॉलर आदि।

मेरा रूप

मेरे द्वारा ही देश और विदेश में लोग व्यापार का हिस्सा बने है। मुझे देकर लोग अपने ज़िन्दगी की सभी  आवश्यक वस्तुएँ प्राप्त कर सकते हैं, पुराने समय में मेरा रूप कुछ और तरह का था।

मेरी पूजा की जाती थी और मुझे बहुत सम्मान भी मिलता था। लोग एक-दूसरे की जान लेने को भी तैयार रहते थे। गुरुकुलों में भी ज्ञान प्राप्त करने के समय फीस नहीं ली जाती थी। विद्वानों की बहुत पूजा होती थी।

सबसे बड़ा रुपया होता है

मेरे आ जाने से सभी की ज़िंदगी, बोलने का ढंग, पहनने का ढंग, चाल-ढाल सभी में परिवर्तन आ जाता है, कल का राम, राम प्रसाद कहलाने लगा है। मेरी खुशबू से सभी मुश्किलें ख़ुद ही मिट जाती हैं।

मेरी सबसे बड़ी खूबी है कि, जिसको प्राप्त हो जाऊँ वही व्यक्ति कुलीन, दर्शनीय, पण्डित और गुणवान बन जाता है। उसके ऊपर रिश्तेदार व मित्र, मक्खी की तरह आगे पीछे घूमते रहते हैं।

पुराने युग में लोग कहा करते थे मेरी और सरस्वती की बहुत बड़ी दुश्मनी है। कहने का मतलब हम दोनों एक जगह पर साथ नहीं हो सकते। अगर व्यक्ति के पास विद्या सरस्वती होती है तो मैं नहीं होता।

अगर मैं हूं तो विद्या नहीं मिल सकती पर यह सिर्फ कुछ लोगों की फैलाई धारना है । परन्तु लगता है आज के समय में यह सिद्धान्त बदल गया, मेरी और सरस्वती में दोस्ती हो गई है।

मेरा और सरस्वती का संबंध

एक धनी व्यक्ति ही प्रख्यात विद्यालय में अपने बच्चों को शिक्षा प्रदान करवाता है। परीक्षा में अच्छे अंक दिलवाने के उद्देश्य से ट्‌यूशन लगा देता है। टीचर को घुस देकर फेल छात्र को पास करा लिया जाता है।

मेरी महिमा दिन-प्रतिदिन इसी तरह बढ़ती रही तो वह दिन दूर नहीं जब शिक्षा केवल और केवल अमीरों के लिए ही रह जाएगी। मेरी ही अहमियत से परिचित होकर लोग विदेश जाकर शिक्षा ग्रहण कर पाता है।

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मैं जिस व्यक्ति के पास जाके रुकता हूँ, उस व्यक्ति में घमंड, लालसा, जलन, गुस्सा, घृणा जैसे अवगुण आ जाते हैं। मुझे प्राप्त करने की लालसा में लोगों में दिन प्रतिदिन लालच बढ़ने लगता है।

धन को इकठ्ठा करने के लिए वह गलत रास्ते पर चलता है। काला बाजारी, मिलावट, भ्रस्टाचार, रिश्वतखोरी जैसे राह पर चलकर अपनी तिजोरियों को भरता है।

गरीब-अमीर सभी मुझे प्राप्त करने की दौड़ में शामिल हैं। गुण-अवगुण का विचार किए बग़ैर मुझे बेशकीमती समझ कर सभी प्राप्त करने के लिए गलत रास्ते अहमियत भागे जा रहे हैं।

मेरी ज़रूरत

मेरा महत्व यह है कि, मेरे रहने पर सब लोग मित्र बन जाते हैं। मेरी नामोजूदगी में कोई साथ नहीं देता। मेरे न रहने पर कोई रिश्तेदार उन्हें नहीं पूछता। जिन घरों में मेरी मौजूदगी नहीं होती, उसका कोई सम्मान नहीं करता।

अगर शादी में दहेज पर्याप्त नहीं हो तो कोई भी एक लड़की से शादी करने को राजी नहीं रहता। मेरे ही वजह से लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं और आत्महत्याएँ होती हैं। यहाँ तक कि लोग अपने सबसे प्रिय रिश्ते का खून तक कर देते हैं।

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