मेरे गाँव पर निबंध (My Village Essay in Hindi)

साल में एक बार जब गर्मियों की छुट्टी चल रही होती है, तब आधे से ज्यादा लोग अपने गाव जाना पसंद करते है। या फिर किसी बड़े त्योहार के दिन कई सारे लोग गांव जाते है। हम सभी को अपना गाव बहुत प्यारा होता है। इसलिए सभी को साल में एक बार काम से छुट्टी लेकर अपने गांव जाना चाहिए।

भारत की लगभग 70% से अधिक आबादी गांवों में रहती है। इसी तरह, गाँव खाद्य और कृषि उपज के मुख्य स्रोत हैं जिनका हम उपभोग करते हैं। आजादी के बाद, गांवों में आबादी के साथ-साथ शिक्षा दोनों में बहुत वृद्धि हुई है। गाँव के लोग अपने काम के लिए अधिक समर्पित होते हैं फिर शहर के लोगों के पास भी अधिक ताकत और क्षमता होती है फिर शहरी क्षेत्र के लोग।

इसके अलावा, पूरा गांव शांति और सद्भाव में रहता है और किसी भी तरह का कोई संघर्ष नहीं है। ग्रामीण एक दूसरे के दुख और सुख में आगे आते हैं और वे सहायक प्रकृति के होते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात, आप रात में तारे देख सकते हैं जो अब आप शहर में नहीं देख सकते हैं।

गांव का जीवन

एक शहर और एक गांव इन दोनों में बहुत बड़ा फर्क होता है। एक शहर में हमेशा गाड़ियों की आवाज कारखानों से निकले हुए केमिकल का पानी जो हमेशा नाले से बहता रहता है और ऐसी बहुत सारी गंदगी होती है इसलिए यहां हमेशा बीमारियां बढ़ती हुई रहती है।

लेकिन इस गांव में ऐसी कोई मुसीबत नहीं होती है वहां चारों तरफ पेड़ पौधे होते हैं खेती होती है। कारखानों का तो नामोनिशान नहीं होता है इसलिए गांव में कोई भी कभी भी बीमार नहीं रहता है इसलिए गांव का जीवन शहर के जीवन से बहुत ज्यादा बेहतर होता है।

क्योंकि मेरे गांव में बहुत सारे पेड़ पौधे होते है और मेरा पूरा गांव जंगल से घिरा हुआ है इसलिए मेरे गांव में कोई बीमारी नहीं होती। यहां की नदियां भी शहर के फिल्टर मशीन से मिलने वाले पानी से भी बहुत ज्यादा स्वच्छ होती है। इसलिए यहां का पानी कभी भी गंदा नहीं रहता जिससे कोई भी जानवरों को यहा का पानी पीने से कोई भी तकलीफ नहीं होती है।

गांव की रचना

शहर में भले ही कितने भी बड़ी बड़ी बिल्डिंग क्यों ना हो। कितने भी अच्छे रास्ते क्यों ना हो लेकिन यह सभी मानव निर्मित है। इसके लिए लोगों ने बहुत ज्यादा मात्रा में पेड़ों को कांटा है जिससे शहर में सभी सुविधाएं होने के बावजूद भी बहुत सारी बीमारियां झेलनी पड़ती है।

लेकिन एक गांव में कोई भी बड़ी बिल्डिंग नहीं रहती और अच्छे रास्ते भी नहीं रहते और कोई ज्यादा सुविधा भी नहीं रहती परंतु अपने गांव में चारों तरफ जंगल ही जंगल रहता है जो एक प्राकृतिक रचना है।

जैसे इस प्रकृति ने खुद बनाया है जो एक शहर से कहीं ज्यादा सुंदर दिखती हैं। ऐसे है मेरे गांव की रचना इसलिए मुझे भी शहर से मेरा गांव ही बहुत अच्छा लगता है।

गांव का वातावरण

शहर में बिल्डिंग तो बहुत बड़ी बड़ी होती है लेकिन यहां पेड़ पौधे ना के बराबर होते हैं इसलिए यहां का वातावरण हमेशा खराब ही रहता है जिससे बाद में हमें ही तकलीफ झेलनी पड़ती है।

लेकिन मेरे गांव में चारों तरफ से जंगल होने के कारण सभी जगह पेड़ पौधे बहुत ज्यादा मात्रा में होते हैं इसलिए मेरे गांव का वातावरण हमेशा स्वच्छ और शुद्ध रहता है।

मेरे गांव में ज्यादा मात्रा में जंगल होने के कारण यहां गाड़ियों का भी आना जाना बहुत कम होता है इसलिए गांव में कभी भी ध्वनि प्रदूषण नहीं होता है यहां हमेशा सुबह से शाम तक पक्षियों की और प्राणियों की आवाज आती रहती है जो सुनने में भी बहुत अच्छी लगती है।

जल प्रदूषण

मुंबई जैसे शहर में स्वच्छ पानी वाली नदी ढूंढना मतलब कोयले में हीरा मिलने जैसा है। यहां हर तरफ आपको नदिया तो मिलेगी लेकिन इन सभी नदी के किनारे मैं ढेर सारा कचरा मिलेगा इन नदी के पानी में कारखानों से निकला हुआ केमिकल मिलेगा।

जिसकी वजह से शहर में आधे से ज्यादा बीमारियां पानी की वजह से ही होती हैं। लेकिन मेरे गांव में यह सब नहीं होता है मेरे गांव में जहां भी नदी का पात्र होता है उस नदी के दोनों तरफ पेड़ पौधों की हरियाली होती है। जिससे वहां का वातावरण हमेशा शुद्ध रहता है।

इसलिए वहां का पानी भी शुद्ध रहता है। गांव में शहर की तरह शुद्ध पानी पीने के लिए फिल्टर मशीन का उपयोग नहीं करते यहां के लोग ज्यादातर कुए का पानी ही पीते हैं।

गांव के काम

शहर में हर तरह के काम होते है, लेकिन गांव में एक ही काम सबसे बड़ा होता है और वह काम है खेती करना। क्योंकि यही काम गांव का प्रमुख काम होता है।

उसके बाद गांव के कई सारे लोग पशुपालन करते हैं कोई लोग मधुमक्खियों का पालन करते हैं। जिससे उन्हें मध मिलता है, बाद में वह मध गाव के लोग बेचते है। मुर्गियों का पालन भी होता है और आटा बनाने वाली चक्की जैसा लघु उद्योग भी होता है।

मेरा गाँव का वर्णन

मेरा गाँव कम गर्मी वाले क्षेत्र में मौजूद है जिसमें तेज़ गर्मी और सर्दियाँ हैं। ज्यादातर मैं छुट्टियों के कारण गर्मियों में अपने गाँव जाता हूँ। हालाँकि गाँव गर्मियों के दौरान शहर की तुलना में कहीं अधिक ठंडा है। इसके अलावा, आपको हवा की वजह से किसी गांव में एयर कंडीशनर की जरूरत नहीं है। एक गाँव में आप हरियाली देखते हैं और लगभग हर घर में उनके आँगन में कम से कम एक पेड़ होता है।

इसके अलावा, गर्मी की फसल का मौसम है, इसलिए मैंने शायद ही कोई फसल देखी हो। इसके अलावा, पहले अधिक कच्चा घर बनता था, लेकिन अब परिदृश्य बदल गया है और पक्के घर की संख्या बढ़ गई है, जिसमे कंक्रीट, सीमेंट, इटे जैसी आधुनिक सामग्री का शामिल है। साथ ही, गाँव के लोग शहरों के लोगों की तुलना में मित्रवत हैं। 

इसके अलावा, मेरे गाँव के बारे में मुझे जो बात सबसे ज्यादा पसंद है, वह है ताजा और पुनर्जीवन वाली हवा। 4-5 घंटे सो जाने पर भी हवा ताजगी का अहसास देती है। सबसे महत्वपूर्ण बात, रात में मैं उन सितारों को देखता हूं और उनकी गिनती करता हूं जो मैं शहर में नहीं कर सकता।

गाँव का महत्व

भारत में प्राचीन काल से ही गांवों का अस्तित्व था और वे किसी भी चीज की मांग और आपूर्ति के लिए एक-दूसरे पर निर्भर थे। इसी तरह, वे देश की वृद्धि और विकास में बहुत योगदान देते हैं। भारत एक ऐसा देश है जो अपने द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र से अधिक कृषि पर निर्भर है।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है और इस बड़ी आबादी को भोजन देने के लिए उन्हें भोजन की आवश्यकता होती है जो गांवों से आता है। यह बताता है कि वे हमारे और सभी के लिए महत्वपूर्ण क्यों हैं।

निष्कर्ष

हम कह सकते हैं कि, गाँव अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। मेरा गाँव भारत के सभी गाँवों का एक हिस्सा है। जहाँ लोग अभी भी शांति और सद्भाव में रहते हैं। गांवों के लोग मिलनसार हैं और शहरी क्षेत्रों के लोगों की तुलना में खुशहाल और समृद्ध जीवन जीते हैं।

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