महाशिवरात्रि पर निबंध (mahashivratri par nibandh)

प्रस्तावना

पूरे भारत में हिंदुओ के लगभग तैतीस करोड़ देवी-देवता माने जाते हैं, जिनको हम मानते व अर्चना करते हैं। मगर उनमें से सबसे उत्कृष्ट भगवान शिव माने जाते है। भगवान शिव के भक्त करोड़ों में हैं।

शिव को दाता के स्वामी एवं मुख्य देव व भोले शिव कहा जाता है और शिव जी के इस दुनिया में प्रचंड भक्त हैं, वे हमेशा उनकी पूजा और अर्चना करते है। ऐसी मान्यता है कि, सभी देव इतनी सरलता से प्रसन्न नही होते, जिस तरह शिव भोले होते है।

भगवान शिव की प्रसिद्धि

पुराने भास्करों व ग्रंथों के मुताबिक महाकाल व भगवान शिव के अनगिनत प्रसिद्धि है, जिसमे कुछ प्रख्यात नाम हैं- भगवान शिव, महाकाल, भोले शंकर, भोलेनाथ, गंगाधर, पशुपति, त्रिनेत्र,पार्वतिनाथ और कई अन्य अनेक नामों से माने जाते हैं।

शिवरात्रि नाम किन कारणों से पड़ा?

शिव की गाथा के अनुसार शिव शंकर हर प्रकार के जीव-जन्तुओं के मालिक व स्वामी माने जाते है। ये हर श्रेणी के जीवों व प्राणियों, कई उड़ने वाले कीड़े-मकोड़े भगवान शिव की कामना व अभिप्राय से ही सब तरह के कार्य किया करते है।

देव भोले की पुरानी रीतियों के मुताबिक भगवान शिव साल में छ: महीने तक कैलाश नामक पर्वत पर गहन तपस्या में तन्मय हुए रहते है। जिसके पश्चात सब प्रकार जीव जंतु व पतंगे अपने रहने के स्थान पर वापस चले जाते हैं।

अतः छः महीने के अंतराल के सम्पूर्ण होने के पश्चात ही कैलाश पर्वत से उतर कर धरती पर रहने आते है। फिर उनका अवतरण धरती पर फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को पड़ने वाली तिथि को हुआ करता है।

इसी कारण अवतरण का यह प्रमुख दिन महाकाल के भक्तों के लिए महाशिवरात्रि के नाम से प्रख्यात हो गया है।

शिवरात्रि का महत्व 

महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव मंदिरों को बहुत ही खूबसूरती से सजाया जाता है। इसके बाद सेवक और उपासक सारा दिन भूखे रहकर निराहार व उपवास में रहते हैं।

भक्त अपने अनुकुल हेतु शाम के समय में फल, बेर, पय व दुग्ध वगैरह लेकर शिव के मंदिरों में प्रस्थान करने जाते है। सभी शिवजी के मंदिरों में दूध व दूध से बनी वस्तुओं को अर्पित करते है और दूध में मिली हुई शुद्ध जल से शिवलिंग पर चढ़ाते है और इस तरह शिव जी को शिवरात्रि पर प्रसन्न किया जाता है।

उसके बाद शिवलिंग पर फल, फूल व बेर आदि व दूध सौगात और उपहार के तौर पर चढ़ाया करते है। ऐसा करना आज के दिन काफी शुभ और अनिवार्य माना गया है। कहा जाता है कि ऐसा करने से पुण्य होता है।

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