History of Watch In Hindi 2020

घडी मतलब वो चीज़ जो हर किसीके हाथ के कलाइयों में बंदी हुई दिखती है, जो घर के दिवार पे या ऑफिस के दिवार पर टंगी हुई दिखाई देती है। जिससे हमेशा हमें वक़्त पता चलता है। वही वक़्त जिसे देखके हम लोग हमेशा  अपने कामपे दौड़ते रहते है। उसी घडी में वक़्त देखे बिना हम कोई काम वक़्त पे नहीं कर सकते।

इसी घडी का अविष्कार  होने से पहले लोग सूरज की रोशनी को और पानी के उतार – चढ़ाव के माध्यम से वक़्त का पता लगा लेते थे। घडी का अविष्कार बहुत प्राचीन समय में हुआ था। लेकिन वो अविष्कार एक ही बार में नहीं हुआ। उसका अविष्कार बहुत ही धीरे और समय के साथ बदलता चला गया। जब प्राचीन समय में लोग सूरज की दिशा देखके समय का पता करते थे तब उसमे कभी कभी एक मुश्किल आती थी , और वो मुश्किल  थी आकाश में आते बादल। जब बारिश का वक़्त होता था तब ये मुश्किल और बढ़ती थी तब वक़्त का पता चलना बहुत ही मुश्किल हो जाता था।

जल घडी:

जब सूरज की दिशा देखके समय पता करना मुश्किल होते जा रहा था तब जल घडी का अविष्कार हुआ। उस जलघड़ी का अविष्कार चीन के एक व्यक्ति ने किया था। उस व्यक्ति का नाम था “सु संग”|

प्राचीन ग्रीस में सवा दो हजार साल पहले पानी से चलने वाली घडिया हुआ करती थी। जिसमे अलार्म भी हुआ करता था। जिममें पानी के गिरते स्तर के साथ तय समय बाद घंटी बज जाती थी। घडी का अविष्कार ई.स 996 में पोप सिलवेस्टर ने किया था। उसके बाद ईसवी सन 1288 मे वेस्टमिस्टर के घंटाघर मे घड़ियाँ लगाई गई थीं।

आज के समय में हम जो घडी हाथ के कलाई पर पहनते है वैसे ही घडी सबसे पहले फ़्राँसीसी गणितज्ञ और दार्शनिक ब्लेज़ पास्कल ने बनायी थी। वही ब्लेज़ पास्कल जिन्होंने कैलकुलेटर का आविष्कारक किया था।

घडियोंके प्रकार:

जबसे घडी का अविष्कार हुआ है तबसे बाजार में  अलग अलग प्रकार की घडिया आने लगी है। जैसे की:

  • एनालॉग घड़ियों
  • डिजिटल घड़ियाँ
  • हाइब्रिड घड़ियाँ
  • आरामदायक घड़ियाँ
  • पोशाक घड़ियाँ
  • क्वार्ट्ज घड़ियाँ
  • मैकेनिकल स्वयंचलित घड़ियाँ
  • स्मार्ट घड़ियाँ

एनालॉग घड़ियाँ:

एनालॉग वॉच एक ऐसी घड़ी है जिसका डिस्प्ले डिजिटल नहीं है, बल्कि पारंपरिक क्लॉक फेस के साथ एनालॉग है। नाम एक प्रतिशोध का एक उदाहरण है; यह एनालॉग घड़ियों को भेद करने के लिए तैयार किया गया था।

डिजिटल घड़ियाँ:

1920 के दशक में, पहली डिजिटल मैकेनिकल कलाई घड़ी दिखाई दी। पहली डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक घड़ी, 1970 में पल्सर एलईडी प्रोटोटाइप, हैमिल्टन वॉच कंपनी और इलेक्ट्रो-डेटा द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया था, जो जॉर्ज एच. थिएस द्वारा स्थापित किया गया था। 4 अप्रैल 1972 को, पल्सर आखिरकार तैयार हो गया, 18 कैरेट सोने में बना और $ 2,100 में बिका।

हाइब्रिड घड़ियाँ:

एक हाइब्रिड स्मार्टवॉच एक नियमित मैकेनिकल वॉच और एक स्मार्टवॉच के बीच एक संलयन है, जिसमें यह पारंपरिक वॉच मैकेनिक्स के साथ कुछ जुड़े हुए फीचर्स को जोड़ती है। इसमें टचस्क्रीन नहीं है, आमतौर पर हर दिन चार्ज करने की आवश्यकता नहीं होती है, और यह प्रौद्योगिकी के टुकड़े की तरह नहीं दिखता है। यह सामान्य घड़ी की तरह दिखता है।

आरामदायक घड़ियाँ:

एक आरामदायक घड़ी एक आदमी के लिए एकदम सही गौण है जिसमें एक जीवन शैली है। एमवीएमटी से हमारे अद्वितीय डिजाइन आराम, उपयोगिता और एक आरामदायक शांत रूप प्रदान करते हैं। अपने आप को, एक दोस्त, या एक आकस्मिक घड़ी में एक प्यार एक सरल देखो कोई फर्क नहीं पड़ता।

पोशाक घड़ियाँ:

पोशाक घड़ियाँ वही होती है जो आपकी पोशाक पे जचती हो। आप जो भी पोशाक पहने तो घडी भी उसी रंग की और उस पोशाक पर जचने वाली होती है।

क्वार्ट्ज घड़ियाँ:

1960 के दशक के अंतिम सप्ताह में क्वार्ट्ज वॉच क्रांति का पहला साल्वो निकाल दिया गया था। 25 दिसंबर को टोक्यो में, Seiko ने Astron, दुनिया की पहली क्वार्ट्ज कलाई घड़ी पेश की थी। इसके बैटरी चालित आंदोलन में 8,192 हर्ट्ज की आवृत्ति के साथ एक क्वार्ट्ज थरथरानवाला दिखाया गया था, जो एक दिन में पांच सेकंड के भीतर सटीक होता है।

मैकेनिकल स्वयंचलित घड़ियाँ:

ऑटोमैटिक घड़ियों का इतिहास 1770 के दशक में स्विस वॉचमेकर अब्राहम-लुई पेरेल के डिजाइनों से शुरू हुआ था। उन्होंने यांत्रिक उपकरण तैयार किया जो आठ दिनों के लिए स्वचालित घड़ी को बिजली देने के लिए उपयोगकर्ता के शरीर के आंदोलन द्वारा पर्याप्त ऊर्जा में बनाए गए उनकी गणना हस्तांतरण ऊर्जा द्वारा कर सकता था।

स्मार्ट घड़ियाँ:

स्मार्टवॉच एक ऐसी घडी है जो आपने हाथ में  पेहेना हुआ एक मिनी कंप्यूटर या मिनी मोबाइल जिसमे वक़्त के साथ मोबाइल की कही सारी सुविधाएं दि है। जिसमे आप इस घडी से ब्लूटूथ, गाना बजाना, अपने रनिंग स्टेप काउंटिंग करना, मेसेज रीड करना, वीडियो देखना, इंटरनेट कनेक्ट करना और भी बहुत सारे ऑप्शन दिए गए है।

इस तरह घडियोंका उनके अविष्कार से लेकर अभी तक बदलाव हुए। इन घडियोंका प्राचीन काल के जल घडियोंसे लेकर आज के स्मार्ट घड़ियों तक आधुनिकीकरण हुआ। इस तरह था अपने घडियोंका इतिहास।

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