History of Japan in Hindi

जापान देश एशिया महाद्वीप में स्थित है| जापान जिस महाद्वीप में स्थित है वो महाद्वीप प्रशांत महासागर में स्थित है| चीन, कोरिया और रूस ये देश जापान के नजदीकी देश है| जापान के लोकसंख्या के बारे में बोले तो ९८.५ % मूल निवासी, ०.५ % कोरियन, ०.४ % चाइनीस और ०.६% अन्य लोक रहते है|

जापान के लोक अपने देश को निप्पॉन कहते है| निप्पॉन का हिंदी में मतलब होता है सूर्योदय| ये नाम इसलिए रखा है क्योंकि दुनिया में सबसे पहला उगता हुआ सूरज जापान में दिखता है। टोकियो जापान की राजधानी है| योकोहामा, ओसाका और क्योटो ये जापान के महानगर है| बौध्द धर्म यहाका प्रमुख है| जापान की ९६% लोकसंख्या बौध्द धर्म की है|

जापान बहुत सारे द्वीपों से मिलकर बना हुआ देश है| द्वीपों की गणना की तो वो कुल मिलाकर ६८०० द्वीप होते है| इतने द्वीपोमेसे ३४० द्वीप ही १४ किलोमीटर से बड़े है| जापान को चार बड़े द्वीपों का देश कहा जाता है| उन चार द्वीपोंका नाम है होक्काइडो, होन्शू, शिकोकू तथा क्यूशू। जापान की जमीन पहाडोंसे घिरी होने के कारण यहाँ कृषि योग्य जमीन १३.४% है, ३.५ प्रतिशत क्षेत्र में पानी है और ४.६ प्रतिशत भूमि आवासीय उपयोग में है।

जापान का इतिहास:

जापान का प्रथम लिखित साक्ष्य  ई.स.वी सन ५७ के एक चीनी लेख से मिलता है। इसमें एक ऐसे राजनीतिज्ञ के चीन दौरे का वर्णन है, जो पूर्व के किसी द्वीप से आया था। धीरे-धीरे दोनों देशों के बीच राजनैतिक और सांस्कृतिक सम्बंध स्थापित हुए। उस समय जापानी एक बहुदैविक धर्म का पालन करते थे, जिसमें कई देवता हुआ करते थे। छठी शताब्दी में चीन से होकर बौद्ध धर्म जापान पहुंचा। इसके बाद पुराने धर्म को शिंतो की संज्ञा दी गई जिसका शाब्दिक अर्थ होता है – देवताओं का पंथ। बौद्ध धर्म ने पुरानी मान्यताओं को खत्म नहीं किया पर मुख्य धर्म बौद्ध ही बना रहा।

शिंतो मान्यताओं के अनुसार जब कोई राजा मरता है तो उसके बाद का शासक अपना राजधानी पहले से किसी अलग स्थान पर बनाएगा। बौद्ध धर्म के आगमन के बाद इस मान्यता को त्याग दिया गया। ७१० ईस्वी में राजा ने नॉरा नामक एक शहर में अपनी स्थायी राजधानी बनाई। शताब्दी के अन्त तक इसे हाइरा नामक नगर में स्थानान्तरित कर दिया गया जिसे बाद में क्योटो का नाम दिया गया। सन् ९१० में जापानी शासक फूजीवारा ने अपने आप को जापान की राजनैतिक शक्ति से अलग कर लिया। इसके बाद तक जापान की सत्ता का प्रमुख राजनैतिक रूप से जापान से अलग रहा।

यह अपने समकालीन भारतीय, यूरोपी तथा इस्लामी क्षेत्रों से पूरी तरह भिन्न था जहाँ सत्ता का प्रमुख ही शक्ति का प्रमुख भी होता था। इस वंश का शासन ग्यारहवीं शताब्दी के अन्त तक रहा। कई लोगों की नजर में यह काल जापानी सभ्यता का स्वर्णकाल था। चीन से सम्पर्क क्षीण पड़ता गया और जापान ने अपनी खुद की पहचान बनाई। दसवी सदी में बौद्ध धर्म का मार्ग अपनाया। इसके बाद से जापान ने अपने आप को एक आर्थिक शक्ति के रूप में सुदृढ़ किया और अभी तकनीकी क्षेत्रों में उसका नाम अग्रणी राष्ट्रों में गिना जाता है।

विज्ञानं और तंत्रज्ञान:

जापान के अधिक प्रमुख तकनीकी योगदान के कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में, मशीनरी, भूकंप इंजीनियरिंग, औद्योगिक रोबोटिक्स, प्रकाशिकी, रसायन, अर्धचालक और धातु पाए जाते हैं। जापान रोबोटिक्स उत्पादन और उनका उपयोग करता हैं, आधे से अधिक रोबोटों को दुनिया के औद्योगिक विनिर्माण के लिए इस्तेमाल किया| जापान में QRIO, ASIMO और AIBO जैसे रोबोटों का उत्पादन किया है। जापान दुनिया के मोटर वाहन का सबसे बड़ा उत्पादक है |

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