कचरा प्रबंधन पर निबंध (Essay on waste management in Hindi)

निसंदेह हम सबको या हर एक मनुष्य को लगता होगा की दैनीक जीवन मे जिस भी तरह का कचरा उत्पन्न करते हे वो सामान्य है और उस कचरे को कही भी रख देना या फेंक देना हम सबके लिए आम बात होगी।

परंतु आज के युग में लोगों के लिए यह दोनों सामान्य बाते विश्व अंतर पर दुनिया के लिए विनाश और घातक बन गयी है ।यही कारण है जिसकी वजह से आज हमारी धरती व प्रकृति हाथ से फिसलती जा रही है ।

सूत्रों के मुताबिक दुनिया भर के देशों में जो बाढ़, भूकंप या और कोई कुदरती समस्या होती है वो और कुछ नहीं बल्कि धरती की कहर है। जिसमे प्रकृति के लिए सबसे घातक है कचरा, जिसे अपशिष्ट भी कहते है।

कचरा प्रबंधन का तात्पर्य या कचरा प्रबंधन क्या है?

कैसे भी प्रकार के कचरे को सही तरीके से निपटाने के लिए उसे संग्रह, परिवहन, बराबर नज़र और कई तरीके की  प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और ऐसे ही प्रक्रिया को  कचरा प्रबंधन या अपशिष्ट प्रबंधन कहते है।

इस तरह का कचरा मनुष्य और धरती व प्रकृति दोनों के दैनिक उपयोग से उत्पन व प्राप्त होता है। इसको सही से  इस्तेमाल ना करने पर पूरे देश और विश्व के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। इस तरह कचरे को प्रबंध ना किया जाए तो पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकता  है ।

कचरा प्रबंधन के प्रकार

हालांकि कचरा प्रबंधन के कई और अनेक रूप है, परंतु सभी मनुष्यों के लिए चार तरह के प्रकार जानेंगे।

लैंडफ़िल

कचरा प्रबंधन का सबसे प्रथम व पहला, अहम और प्रमुख व सबसे ज़्यादा जान ने में है लैंडफिल। जिसमे कचरा जमीन में बड़े गड्ढों में दफन हो जाता है और फिर मिट्टी की परत से ढक जाता है। यह कचरा कई वर्षों में धीरे धीरे इन गड्ढों के अंदर विघटित हो जाता है। इस विधि में कचरे द्वारा ली गई गंध और क्षेत्र का उन्मूलन होता है।

भस्मीकरण

दूसरे नंबर पर आता है वो कचरा प्रबंधन जो है, भस्मीकरण अथवा दहन। इस प्रक्रिया के अंतर्गत आती हैं वो क्रियाएं जिसमे कचरे को सबसे ज़्यादा और ऊँचे तापमान मे जलाकर काटके और खत्म करके उनके बचे हुए टुकड़ों व अवशेषों अथवा गैस जैसे कार्य में आने वाली चीजों में या कार्यों में इस्तेमाल की जाती है। इसके बाद इसे उत्पादनो में बदल दिया जाता है ।

इस प्रक्रिया से हम मुख्य ठोस प्रकार के कचरे को ही निपटान कर सकते है । ठोस कचरा यानि मानव और जानवरों की विविध गतिविधियों से उत्पन्न होने वाला कचरा ।

पुनर्चक्रण

कचरा प्रबंधन का तीसरा व अबसे अहम प्रक्रिया है, पुनर्चक्रण और इस प्रक्रिया के दौरान जो कचरा महत्वपूर्ण होता है या अहम होता है उस कचरे को फिर से नए तरीकों से व्याप्त करके अथवा नए तरीके से बनाके नई सामग्री में बदलने की प्रक्रिया पर ज़ोर दिया जाता है ।

सबसे अच्छी व महत्वपूर्ण बात इस प्रक्रिया की ये है कि इसमे जो ग्रीनहाउस गैस बनती है वो बहुत ही ज़्यादा कम मात्रा में बनती है और जो भी चीजें इस प्रक्रिया से निकलती हैं उन चीजों को बहुत सारे कच्चे माल के लिए उपयोग और इस्तेमाल में आती है ।

खाद

इस कचरा प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, खाद । इस प्रक्रिया को अबसे आसान , सरल और प्राकृतिक प्रक्रिया माना जाता है। ऐसे कई सारे पेड़-पौधों और रसोई जैसे जैविक कचरे का प्रबंध इस प्रक्रिया में किया जाता है ।

ई-कचरा निपटान

मनुष्य सिर्फ यही वाले हिस्से के प्रक्रिया को भी उपयोग कर सकते हैं। ई-कचरा प्रबंधन बहुत पहले उपयोग में नहीं आती थी, परंतु बीते दस सालों में इसकी आवश्यकता काफी बढ़ने लगी है ।

इसी कारण से आजकल सब जगह इलेक्ट्रॉनिक तौर पर चलनी वाली उपकरणों ने जगह ले ली है औऱ इन्ही कारणों की वजह से ई-कचरा भी बहोत ज्यादा मात्रा मे उत्पन्न होता है और इस तरह ई-कचरा निपटान भी आज की सबसे ज़्यादा बढ़ती समस्या बन गयी है ।

आम तौर पर ई कचरे में पारा, आर्सेनिक, सीसा, ब्रोमिनेटेड अथवा कैडमियम जैसे कई सारे ऐसे पदार्थ  हैं जो काफी घातक व विनाशशील होते है और इस तरह के उत्पन पदार्थ एक संपूर्ण मानवता के लिए खतरनाक सिद्ध होते है। आपको यह बात बहुत आश्चर्यचकित कर देगी की, पूरे दुनिया में उत्पन होने वाले सब मिल करके ई-कचरे का चार प्रतिशत हिस्सा भारत मे पैदा होता है ।

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निष्कर्ष

कचरा प्रबंधन पुरे पर्यावरण के लिए, इस समाज के लिए और पुरे जीवसृष्टि के लिए बहुत ज्यादा जरुरी है। क्योंकि अगर हम लोग कचरा प्रबंधन नहीं करेंगे, तो पुरे पर्यावरण को नुकसान होगा, समाज में विभिन्न प्रकार की बीमारियां फ़ैल जायेगी। जो हमारे जीवन के लिए बहुत बड़ा खतरा बन जाएगी। इसलिए हम सभी को मिलकर कचरा प्रबंधन की ओर कदम उठाने चाहिए। जिससे पूरी दुनिया में कचरे से फैलने वाला प्रदुषण कम हो जाएगा।

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