अंतरिक्ष पर निबंध (Essay On Space In Hindi)

प्रस्तावना

अन्तरिक्ष से संबंधित बातों ने शुरुआत से हम देश वसियों को अपनी ओर खींचने का दम रखा है। जब अंतरिक्ष पे यात्रा करना बिल्कुल असंभव था, तब मनुष्य केवल कल्पना और कहानियों के द्वारा ही अंतरिक्ष की सैर का स्वप्न देख लिया करता था।

अंतरिक्ष यात्रा अब संभव

अपने इस सपने को सरलता का रूप देने के लिए इन्सान ने अंतरिक्ष अनुसंधान की शुरुआत कर दी और उसे बीसवीं सदी तक इस क्षेत्र में शानदार सफलता हासिल हुई।

इस 21वी सदी के भारत में विज्ञान के क्षेत्र में इतनी वृद्धि हुई है कि, देश अंतरिक्ष के कई रहस्यों की गुत्थी सुलझाने में सफल हो पाया है।

इसके अलावा जो बहुत पूर्व कई लोगों का सपना था कि, चंद्र की सैर करें वह अब काफी सरल हो गया है। वैसे अंतरिक्ष में लोगों के जाने की शुरूआत वर्ष 1957 से प्रारंभ हुई।

पहली जीव अंतरिक्ष की

इस यान के द्वारा ही अंतरिक्ष में जानवरों पर होने बाले कई प्रभावों का खोज करने के लिए प्रथम बार एक ‘लायका’ नामक कुतिया को भेजा।

अन्तरिक्ष की दुनिया को एक और शीर्षक देते हुए 31 जनवरी, सन 1958 को संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वारा ‘एक्सप्लोरर’ नामक अन्तरिक्ष यान निकाला गया।

इस यान के द्वारा पृथ्वी के ऊपर एक महान और विशाल चुम्बकीय क्षेत्र और पूरी धरती पर उसके प्रभावों के ऊपर खोज करना था।

प्रथम यात्री

हम लोगों के अंतरिक्ष अनुसंधान के इतिहास में 20 जुलाई, वर्ष 1969 का दिन बहुत ही यादगार कहा जाता है। आज के ही दिन अमेरिका में रहने वाले दो अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन ने चंद्रमा की सतह पर अपने पैर रख दिए थे।

वे ‘अपोलो-11’ नाम की अन्तरिक्ष यान पर बैठकर चन्द्रमा की सतह पर पहुंच पाने में सक्षम हो गए थे। इसी अन्तरिक्ष यान में इन दोनों के संग माइकेल कॉलिन्स भी मौजूद थे।

नील आर्मस्ट्रांग जब प्रथम बार चन्द्रमा पर पहुंचे, तब उनके मुंह से निकला “सुंदर दृश्य है सब कुछ सुंदर है”।

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निष्कर्ष

अंतरिक्ष के काल की शुरूआत के पश्चात किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि, भविष्य में अंतरिक्ष पर्यटन का दौर भी आएगा। सन 2002 में डेनिस टीटो के द्वारा विश्व के प्रथम अंतरिक्ष पर्यटक बनने का गौरव भारत को प्राप्त हुआ।

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