नई शिक्षा नीति पर निबंध (Essay on New Education Policy in Hindi)

मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की घोषणा की गई थी। यह नीति 21 वीं सदी की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय शिक्षा प्रणाली को बदलने के उद्देश्य से है।

इस नई नीति में प्राथमिक विद्यालयों से संबंधित खराब साक्षरता, संख्यात्मक परिणामों के सुधार, मध्य और माध्यमिक विद्यालयों में ड्रॉपआउट स्तर में कमी और उच्च शिक्षा प्रणाली में बहु-विषयक दृष्टिकोण को अपनाने का प्रयास है।

यह नीति शुरुआती बचपन की देखभाल, पुनर्गठन पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र पर भी ध्यान केंद्रित करती है। जिसमे मूल्यांकन और परीक्षा में सुधार करना, शिक्षक प्रशिक्षण में निवेश करना और उनके मूल्यांकन को व्यापक बनाना शामिल है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत की शिक्षा प्रणाली में एक समग्र परिवर्तन लाने की कोशिश करता है, लेकिन इसकी सफलता इस पर निर्भर करती है कि यह किस तरह अपने देश में लागू होगी।

शिक्षा नीति का महत्व

3 साल की उम्र से स्कूली शिक्षा के लिए 5 + 3 + 3 + 4 मॉडल को अपनाने में, यह शिक्षा नीति बच्चे के भविष्य को आकार देने में 3 से 8 साल की प्रारंभिक वर्षों की प्रधानता को पहचानती है। इस नई शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा का एक महत्वपूर्ण पहलू होता है। जिसमे हाई स्कूल में कला, वाणिज्य और विज्ञान धाराओं के सख्त विभाजन का टूटना है। इस योजना का एक और प्रशंसनीय पहलू इंटर्नशिप के साथ व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत है। इस नई शिक्षा नीति में 18 वर्ष तक के सभी बच्चों को शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के विस्तार का प्रस्ताव दिया जाता है।

इस नई शिक्षा नीति के अनुसार, आवधिक निरीक्षण, पारदर्शिता, गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने और एक अनुकूल सार्वजनिक धारणा के बावजूद संस्थानों के लिए २४ घंटे एक खोज बन जाएगा, जिससे उनके मानक में सर्वांगीण सुधार होगा। यह नई शिक्षा नीति सभी के लिए हिंदी भाषा बनाम अंग्रेजी भाषा की बहस को दफन करता है; इसके बजाय, यह मातृभाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा को कम से कम ग्रेड 5 तक शिक्षा का माध्यम बनाने पर जोर देता है, जिसे शिक्षण का सबसे अच्छा माध्यम माना जाता है।

नई शिक्षा नीति से संबंधित मुद्दे

उपलब्ध ज्ञान, कौशल और उपलब्ध नौकरियों के बीच एक निरंतर बेमेल है। यह उन प्रमुख चुनौतियों में से एक रही है जिन्होंने आजादी के बाद से भारतीय शिक्षा प्रणाली को प्रभावित किया है।

सकल घरेलू उत्पाद के 6% पर सार्वजनिक खर्च का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस नई शिक्षा नीति में वित्तीय संसाधनों को जुटाना एक बड़ी चुनौती होगी।

शिक्षा नीति का भविष्य

शिक्षा एक समवर्ती विषय है। प्रस्तावित सुधार केवल केंद्र और राज्यों द्वारा सहयोग से लागू किए जा सकते हैं। इस नई शिक्षा नीति में शिक्षा की सार्वभौमिकता के लिए सख्त प्रयास करने की जरुरत है।

जिसमे सामाजिक और शैक्षिक रूप से वंचित बच्चों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में मदद करने के लिए ‘समावेशी निधियों’ का निर्माण करना होगा। इस नई शिक्षा नीति में यदि प्रौद्योगिकी एक बल-गुणक है, तो असमान पहुंच के साथ यह बाजों और अंतरों के बीच के अंतर को भी बढ़ा सकता है।

व्यावसायिक प्रशिक्षण पर जोर है, लेकिन इसे प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा, कौशल और श्रम मंत्रालय के बीच घनिष्ठ समन्वय होना चाहिए। तभी शिक्षा नीति का भविष्य उज्वल हो सकता है।

निष्कर्ष

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक अच्छी नीति है क्योंकि इसका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को समग्र, लचीला, बहु-विषयक बनाना है। जिसमे नीति का आशय कई मायनों में आदर्श प्रतीत होता है लेकिन यह वह कार्यान्वयन है जहां सफलता की कुंजी निहित है।

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