मेरा पसंदीदा शिक्षक पर निबंध हिंदी में (Essay on My Favorite Teacher in Hindi)

प्रस्तावना

हम सभी को पता है की हमारे जीवन मे तीन व्यक्ति ऐसी होती है की, जिनके बिना अपनी ज़िंदगी अधूरी रहती है। मतलब जैसे की अपनी धरती पर जब तक सूरज की रोशनी नहीं आती तब तक उसे सुबह नहीं कह सकती।

इस तरह अपने जीवन मे अगर ये तीन लोग नहीं होंगे तो अपनी ज़िंदगी उस अंधेरे की तरह है, जहा कभी प्रकाश हुआ ही नहीं है। वो तीन व्यक्ति है अपनी माँ, अपने पिता और अपने शिक्षक।

शिक्षक अपना वो गुरु होता है, जो हमे ये सिखाता है की हम लोगों को अंधेरे से उजाले मे कैसे आना है। मतलब अगर हमे कोई काम करना है, तो पहले उस काम को सीखना होता है। उसके बाद ही वो काम हम लोग कर सकते है। लेकिन वही काम सीखने के लिए हमे एक शिक्षक की आवश्यकता होती है। क्योंकि वो काम हम लोग खुदसे नहीं सिख सकते।

शिक्षक का वर्णन

हमारे भारतीय संस्कृति मे एक शिक्षक सिर्फ शिक्षक नहीं होता है, बल्कि उन्हे भगवान का दर्जा दिया गया है। इसलिए अपने शिक्षक का हमेशा सम्मान करना चाहिए।

शिक्षक मतलब एक गुरु जिसके सम्मान के लिए अपने भारत देश मे गुरु पौर्णिमा के नाम से त्योहार मनाया जाता है। इसलिए कोई भी काम करने से पहले अपनी गुरु की सलाह जरूर लेनी चलिए।

शिक्षक यानी गुरु का वर्णन आज के जमाने से ही नहीं बल्कि पौराणिक और एतिहासिक जमाने से होता आ रहा है। जैसे की महाभारत काल मे कौरव और पांडवों को शिक्षा देने वाले गुरु द्रोणाचार्य हो या फिर महारती कर्ण को शिक्षा देने वाले गुरु परशुराम हो। इन महान लोगों को आज भी दुनिया याद करती है।

मेरा पसंदीदा शिक्षक

सभी क्षेत्रों मे अलग अलग शिक्षक होते है। लेकिन उन क्षेत्र के शिक्षक उस क्षेत्र मे सिकने वाले कई सारे बच्चों के एक पसंदीदा शिक्षक होते है।वैसे ही मेरे भी पसंदीदा शिक्षक है। जब मै छोटा सा था, मतलब ४ थी कक्षा मे पड़ता था, तब हमे अंग्रेजी का विषय सीखाने के लिए एक शिक्षक आते थे।

वो बहुत ज्यादा कठोर थे। जरासी गलती होते पर बहुत ज्यादा डाटते थे। इसलिए मुझे उनका बहुत ज्यादा डर लगता था। लेकिन वो वही गलती समझा भी दिया करते थे। वो कठोर तो थे, लेकिन वो जब हमे सीखाते थे तब वो एक शिक्षक की तरह नहीं बल्कि एक दोस्त की तरह सिखाया करते थे। इसलिए मुझे अंग्रेजी का विषय बाद मे सबसे सरल लगने लगा था। तबसे वही शिक्षक मेरे सबसे पसंदीदा शिक्षक बन गए। 

इसलिए आज भी जब मै ऑफिस मे काम करता हु, तब कंप्युटर मे अंग्रेजी भाषा मे ही काम करना होता है। तब मुझे हमेशा उनकी याद आती है। मै हमेशा यही सोचता हु की, अगर उस समय उन्होंने अपनी छोटी छोटी गलती पर डाटा नहीं होता तो आज हमे अंग्रेजी भाषा कभी आती ही नहीं। 

  • कोरोनावायरस पर निबंध: Click Here
  • महिला सशक्तिकरण पर निबंध: Click Here
error: Content is protected