कविवर जयशंकर प्रसाद पर निबंध (essay on jaishankar prasad in hindi)

प्रस्तावना

कविता और हिंदी नाटक के बाद, कविवर जयशंकर का नाम पूर्ण लेखन में आता है। उन्हें न केवल महाकावी बल्कि नाटक-सम्राट भी कहा जाता है।

कवि जयशंकर जी वाराणसी में 1889 ईस्वी में जन्मे। पादरी देवी प्रसाद वाराणसी का एक प्रसिद्ध व्यापारी था लेकिन हिंदी साहित्य में उनकी रूचि के कारण, कई कवियों और कलाकार अक्सर घर आते हैं।

इस कारण से, जयशंकर प्रसाद में, कविता के प्रति रुचि को बचपन से जागृत किया गया।

व्यक्तित्व

जयशंकर प्रसाद एक कवि होने के साथ-साथ एक  लिपि के लेखक भी है जो काफी विद्यान और महान तौर पर प्रचलित हुए। वे एक सरल विचार के व्यक्ति हैं। उनकी हर एक लिखी गयी पोस्ट में सच्ची घटनाओं के साथ एक भावना और कल्पना भी शामिल होती थीं।

हिंदी साहित्य को उनकी रचना से बड़ी ताकत मिलती है। ऐसा मानना है कि, नाम हमेशा लेखक में गर्व से लिया जाता है। उनके पिता का नाम देवी प्रसाद था, जो सुंगानी साहू के नाम से प्रचलित थे।

जयशंकर प्रसाद की सबसे पुरानी शिक्षा घर पर रहक़त हुई थी। उन्होंने आगे चलकर कौशल ज्ञान प्राप्त किया और इसके अलाव उन्होंने बड़ी इच्छाओं के साथ हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी और उर्दू प्राप्त किया।

फिर इस महान कवि ने क्वींस कॉलेज ऑफ बनारस से सातवीं कक्षा तक शिक्षा ग्रहण की। घर पर उन्होंने पौराणिक कथाओं, इतिहास, पुरातत्व, दर्शन आदि पर गंभीर अध्ययन करना प्रारंभ कर दिया। वर्ष 1937 में जयशंकर जी ने आध्यात्मिक अध्ययन और अजीब पारिवारिक स्थितियों के प्रभाव में अपनी रचना में स्पष्टता दिखाए।

जन्म और शिक्षा

इनकी प्रारंभिक शिक्षा सब घर से हुई। लंबे समय तक उन्हें स्कूल की शिक्षा नहीं मिल पाई और फिर, पिता और बड़े भाई की मृत्यु के पश्चात, पूरे परिवार का बोझ उनके पास आया, फिर भी उन्होंने अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत और फिलोसाफ में काफ़ी महारत हासिल की।

गतिविधि

जयाशंकर प्रसाद ने ब्राजभाषा में कविता लिखना प्रारंभ कर दिया, परंतु इस महान व्यक्ति ने एक ऊर्ध्वाधर प्रस्ताव में कविता लिखना शुरू किया।

इनकी कुछ महत्वपूर्ण कविता जैसे कि चित्रधर, कुसुम, महाराणा, कमालय, लव-पेट्रिक, झरने, आँसू और महाकाव्य भ्रष्टाचार का मुख्य अंश है।

आशावादी कवि

श्री जयाशंकर प्रसाद को काव्य में बहुत अछि लोकप्रियता हासिल हुई। वैसे, प्रसाद जी के सभी कविताएं असाधारण और दुर्लभ माने जाते हैं, परंतु सिस्टम उनकी क्लासिक संरचना है।

इस कविता के संरचना में, उन्होंने सम्मान से मनुष्यों को एक विशेष प्रकार का संदेश प्रदान किया है। क्योंकि, प्रसाद की आशावादी कवियों में से गिनती होती है। इसके लिए, वह प्रत्येक में निराशावाद का विरोध करते दिखे।

जयाशंकर प्रसाद के दिल में राज्य सेवा की भावना भी बचपन से ही जागृत हुई थी। इस कवि ने भारत एक प्रिय देश है का वर्णन करते हुए भारत को स्वदेश बताया।

निष्कर्ष

सभी का सार मिलाके, हम कह सकते हैं कि जयशंकर प्रसाद काफी नामी और प्रचलित हिंदी आधुनिक कवियों में से एक गिने जाते हैं। छाया कविता, सौंदर्य माइक्रोस्कोपिक चित्र, प्रेम प्रकृति, देश – प्यार और शैली की मजबूत कथा उनकी कविता की अहम पेशकश हैं। उनकी कविताये लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गईं।

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