ईद पर निबंध (Essay on eid in hindi)

प्रस्तावना

ईद हमारे मुस्लिम भाइयों का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। पूरे देश में ईद को लोग ईद-उल-फित्र के नाम से भी प्रसिद्धि देते है।

ऐसा माना जाता है कि, त्योहार रमदान के माह की समर्पण, त्याग, बलिदान, तपस्या व व्रत के पश्चात आता है। यह त्योहार प्रेम और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है और ये अनुरोक्ति संदेश देने वाला पर्व है।

ईद का जश्न

इस दिन हमें हर तरफ हर्षोउल्लास ओर खुशी और मुस्कान का माहौल दिखाई देता है। सब लोग एक होकर और मिलजुलकर ईद का जश्न मनाते हुए दिख जाते हैं और ये त्योहार न केवल मुसलमान भाई, बल्कि सभी धर्मों के लोग ईद मानते हैं और खुद को सौभाग्यशाली समझते है।

रमजान का महीना पूरे 30 दिनों तक चलता है और ये महीना एक व्रत का पाक महीना होता है। रमज़ान को सफल बनाए रखने के लिए मुसलमान लोग दोपहर के समय कुछ नही खाते व पीते हैं।

सूर्य के अस्त से सूर्य के उदय होने के बीच ही लोग कुछ खा या पी सकते है। ये महीना ईद का बहुत ही सख्त और सब्र सिखाता है, जिसमे काफी कठोर होकर तपस्या में रहना होता है।

ईद एक व्रत का माह

ये व्रत का महीना इस वजह से हमें सब्र सिखाता है कि, जब बाहर काफी तप हो रही होती हों, और जब प्यास काफी लगती हो, तब बिना कोई पाबंद व रोक के लगातार एक महीने तक व्रत रखना एक हिम्मत और साहस का कार्य बन जाता है।

हालांकि काम के लोगों और शरीर से कमजोर को इस 30 दिन वाले पवित्र माह को करने की ज़रूरत नहीं और तो और उन्हें थोड़ी कम सख्ती के साथ रमदान रखने की अनुमति है।

बच्चे अगर चाहें तो बड़े होने के पश्चात यह व्रत रख सकते हैं, कमज़ोर व बीमार जब स्वस्थ हो जाएं या अब व्रत रखने के काबिल हो जाये तो इस्लामी मान्यताओं को मानते हुए ये रमज़ान का व्रत कर सकते हैं ।

आखिरकार फलस्वरूप, जब आसमान में ईद के चाँद का दीदार होता हैं, तब शाही पुरोहित ईद की विज्ञप्ति कर दी जाती है। इसके पश्चात हर घर में मीठी सेवइयाँ बनाने की कृति व इंतज़ाम होने लगता है।

बच्चे, बड़े व बूढे सभी शीघ्र ही नहा- धोकर ईदगाह या मस्जिद जाने की तैयारी करने लगते है। फिर जाकर खुद का और खुदा का मिलन होता है। अब किसी में कोई अंतर नहीं रहता है और सब एक हो जाते है।

तब प्रार्थना समाप्ति की घोषणा होती है। उसके बाद सभी लोग  आपस में मिलते है और एक-दूसरे को गले लगाते है। इस तरह ईद की बधाइयों के जश्न का विनिमय होता है। पूरे महीने खुदा की इबादत में लीन रहकर लोगों को यह कामयाबी मिलती है।

निष्कर्ष

ईद के दिन सब लोग आनंदमय दिखाई पड़ते हैं, सब के चेहरे पर अलग ही प्रसन्नता का नूर होता है। गरीब आदमी भी ईद को एक नए जोश व उमंग के साथ मनाता है। खुदा के चौखट में सब उसके बंदे हैं और उसकी रहमत सबके लिए बराबर है। इस दिन बड़े घर के लोग खुले हाथों से दान पुण्य करते हैं। कुरान के मुताबिक ईद के दिन कोई भी उदास व दु:खी न दिखाई दे। इसलिए सबकी मदद करो। किसी असहाय और गरीब की सहायता करो। इसी को धर्म कहा गया है, और इसी को मानवता भी।

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