ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव पर निबंध (Essay on Effects of Global Warming in Hindi)

प्रस्तावना

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से आज पूरी पृथ्वी का तापमान तेजी से बड़ रहा है। क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग में पूरे धरती के वातावरण में जलवायु परिवर्तन हो रहा है।

इसलिए ग्लोबल वार्मिंग को समय पर हमने कम करने की कोशिश नहीं की तो, ये जलवायु परिवर्तन हर दिन तेजी से बदलता चला जाएगा। इस जलवायु परिवर्तन के निर्माण के लिए प्राकृतिक आपदा का योगदान तो है ही, लेकिन इसके साथ मानवनिर्मित आपदा भी उतनी ही जिम्मेदार है।

इसका परिणाम ये हो गया है की, अपने धरती से कई सारे पशु-पक्षियों के प्रजातियाँ हमेशा के लिए लुप्त हो गई है और कुछ प्रजातियाँ लुप्त होने के कगार पर है।

ग्रीनहाउस गैसें

आज की दुनिया एक आधुनिक दुनिया है। इसलिए यहा हर दिन तेजी से विकास होता जा रहा है। जहा हम इंसानों का जीवन इस आधुनिक दुनिया की वजह से और ज्यादा आसान हो गया है।

लेकिन इस आधुनिकीकरण की वजह से जलवायु परिवर्तन भी तेजी से बदलता जा रहा है। जो पूरे धरती के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है। इसमे ग्रीनहाउस गैस भी शामिल है। क्योंकि ग्रीनहाउस गैस में कार्बन मोनॉक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड बहुत ज्यादा मात्रा में होता है।

जो धरती के पूरे वातावरण में फैलता है और सूरज से आने वाले किरणों को वही फसा देता है। जिससे सूरज की किरणे धरती तक ज्यादातर नई पोहोच पाती। जिस कारण धरती का तापमान बड़ने लगता है। जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए बहुत बड़ा योगदान है।

ज्वालामुखी विस्फोट

पृथ्वी पर हमेशा कई ना कई ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते है। ज्वालामुखी विस्फोट एक प्राकृतिक घटना है। जिसे हम इंसान कभी भी नहीं रोक पाएंगे। लेकिन इसी प्राकृतिक आपदा की वजह से अपने धरती पर बढ़ रहे ग्लोबल वार्मिंग में वृद्धि होती है।

क्योंकि एक ज्वालामुखी विस्फोट में बहुत ज्यादा मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलता है। जिससे धरती के सतह का तापमान अचानक बड़ जाता है।

मीथेन गैस

मीथेन गैस एक ऐसी गैस है, जो ग्रीनहाउस गैस का ही एक प्रकार है। यह मिथेन गैस ग्लोबल को तेजी से बड़ने में सबसे ज्यादा प्रभावशाली है।

क्योंकि सूरज की किरणों को धरती तक आने से रोकने में यह गैस कार्बन डाइऑक्साइड से बीस गुना ज्यादा शक्तिशाली है। इस मिथेन गैस का निर्माण पशु अपशिष्ट और ऐसे ही कई सारे मार्गों से होता है।

औद्योगिक उत्पादन

ग्लोबल वार्मिंग के वृद्धि में औद्योगिक उत्पादन का भी उतना ही योगदान है, जितना ग्रीनहाउस गैसे और ज्वालामुखी विस्फोट का है। क्योंकि औद्योगिक उत्पादन मे सभी इंधन से चलनेवाली मशीने होती है।

जिसमे कार, बस और ट्रक जैसी परिवहन सेवाओं के साथ-साथ किसी भी उद्योग में उपयोग की जाने वाली मशीनों का भी योगदान होता है। इनसे कार्बन डाइऑक्साइड और मोनोऑक्साइड जैसी गैसे निकलती है, जो धरती के तापमान को बढ़ाते है।

वनों की कटाई

इस दुनिया में हो रही वनों की कटाई भी ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार है। वनों की कटाई कोई प्राकृतिक आपदा नई है, बल्कि एक मानवनिर्मित आपदा है। जो हम इंसानों ने पैदा की है। क्योंकि हम इंसान अपनी जरूरतों के लिए वनों की कटाई करते है।

एक पेड़ हमेशा वातावरण में फैल रहे कार्बन डाइऑक्साइड को अपने अंदर अवशोषित करता है। लेकिन वनों की कटाई की वजह से ऐसी हानिकारक गैसे पर्यावरण में बहुत तेजी से फैल जाती है। जो आगे चलकर ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती है।

ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम

ग्लोबल वार्मिंग से इस दुनिया को बहुत ज्यादा मात्रा में हानी हो रही है। क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से धरती का तापमान धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।

जिस कारण धरती पर बहुत ज्यादा हानिकारक बदलाव होते जा रहे है। क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से जलवायु परिवर्तन में तेजी से बदलाव हो रहा है। जिस कारण कई सारे जानवरों की प्रजातियाँ इस दुनिया से विलुप्त हो गई है।

ध्रुवीय बर्फ के आवरण तेजी से पिघलते जा रहे है। जिस कारण डूबने वाले समुद्र तटों में वृद्धि हुई है। इसके साथ चक्रवाती तूफान, गर्मी की लहरें, अत्यधिक वर्षा और ऐसे ही कई सारे परिणाम है, जिनकी वजह से पूरे धरती को नुकसान हो रहा है।

निष्कर्ष

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से इस धरती को कई सारे आपदाओं का सामना करना पड़ता है। जिसके कई सारे परिणाम हम इंसानों के साथ साथ पूरे जीवसृष्टि को झेलने पड़ते है। इसलिए हमे मानवनिर्मित आपदाओं को रोखना होगा। जिससे ग्लोबल वार्मिंग की समस्या धीरे धीरे कम होगी और हमारी आने वाली पीढ़ियों के जीवन की रक्षा हो जाएगी। अगर हम इन्ही मानवनिर्मित आपदाओं को रोकने में सफल नहीं होते है तो उन्हे इसके गंभीर परिणाम होंगे। जिसके जिम्मेदार हम लोग होंगे।

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