वर्षा ऋतु का पहला दिन पर निबंध (Barish ka Pehla Din Essay in Hindi)

प्रस्तावना

मानसून का वातावरण सभी मौसमों में सबसे सुहावना प्रतीत होता है। ऐसा शायद ही कोई होगा, जिसको बारिश की वो पहली बूंदों का बेसब्री से इंतज़ार न हो।

आज भोर के समय से ही ज़्यादा गर्मी हो रही थी, जैसे-जैसे सूर्य का तेज दूर आकाश में पहुंचने लगा उसी तरह मेरी भी बेचैनी बढ़ने को आई। हवा तो अब बहने से भी इंकार कर रही थी, क्योंकि धुप बहुत ही तेज प्रकाश की भांति चमक रही थी।

बारिश का वो दिन

बारिश के उस पहले दिन को मैं ज़िन्दगी में कभी नहीं भूल सकता। आषाढ़ का मास आ चुका था और सूर्य जी मानो अपना क्रोध दिखा रहे थे। जितने हरे पेड़-पौधे थे वे सब अब मुरझा रहे थे। तेज गर्मी की वजह से बागों में कोई बहारें नहीं दिख रही थी।

जितने जल के स्रोत थे, वे सब अब सूख रहे थे। जानवर, चिड़िया, इंसान से लेकर सभी प्राणी गरमी के मारे प्यास को तड़प रहे थे। सभी के मन में एक ही इच्छा रह गयी थी कि केवल बारिश हो और किसी प्रकार से हमे पानी मिले।

बिजली के पंखे घूमे जा रहे थे। ऐसे कई घर थे जहां के दरवाजों पर जल का कोई निशान नहीं था। उसके बाद भी लोगों की आँखें आसमान की ओर ही थमी हुई थी।

बारिश का असर

जिस पहाड़ी पर मैं था वहां से हर तरफ केवल पानी-ही-पानी मौजूद था। ऊपर की तरफ से तेज औऱ स्वच्छ नीचे बहते पानी की आवाज काफी अच्छी लग रही थी। पेड़ों की हरी- भरी पत्तियाँ पानी की वजह आए भीगकर चमकने लगी। चारों ओर वृक्ष लहलहाने लगे।

कलियाँ खूबसूरती से खिलने को आई और फूल हँसने जैसे प्रतीत हो रहे थे, जो देखने में बहुत ही मनभावन लग रहे थे। सूखे घास बहुत जोर से लहरा रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो सूखी लहरों में भी जान बस गई हो।

इसके नज़दीक ही बहती हुई नदी में धीरे-धीरे पानी इकट्ठा होने लगा। दूर आसमान में उड़ती हुई पक्षियों के झुंड मानो बादलों को शुक्रिया कह रहे हो। मोर तो बस अब नाचने ही वाले थे।

हर तरफ हरियाली

मैं पहाड़ी से नीचे आया उसके बाद फ़िर तलहटी में चरवाहे अपने जानवरों को चरा रहे थे। एक चरवाहा था, जो बहुत ही अच्छी आवाज़ में गा रहा था।

उसी वक्त ठीक सामने से एक आदमी गाता हुआ आया, “आ आई फिर बदरिया सावन की।” उसके बाद में एक बाग में से गुजरा। वहां हर तरफ फूलों की वजह से सिर्फ रौनक छाई हुई थी।

कई-कई दूर तक फैले हुए खेतों में किसान हल जोतने में लगे हुए थे। खेत तेज हवाओं की वजह से लहरा रहे थे।

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