वनों की कटाई पर निबंध (Essay on Deforestation in Hindi)

वनों से भरे जंगल हमारे पर्यावरण के प्राकृतिक संसाधन का एक हिस्सा है। इन्ही वनों की कारण जंगल का वातावरण हमेशा शुद्ध होता है। ये वन पशु पक्षियों का घर होते है।

लेकिन आज के आधुनिक युग में पेड़ों की कटाई बहुत ज्यादा मात्रा में होती है। इसलिए ये पेड़ों से भरी वनों की कटाई पूरे पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा खतरा बनी हुई है।

लेकिन कई लोग इस काम को जारी रखे हुए है। लेकिन इन पेड़ों की कटाई की वजह से सम्पूर्ण पर्यावरण असंतुलित हो जाता है। लेकिन फिर भी, कुछ स्वार्थी लोगों को अपनी जेबें भरनी पड़ती हैं। इसलिए वे इसके बारे में एक बार भी नहीं सोचते।

वनों के कटाई का मुख्य उद्देश

ये जो पूरी दुनिया में वनों की कटाई की संख्या बड़ रही है उसका मुख्य उद्देश है भूमि क्षेत्र को बढ़ाना है मतलब भूमि क्षेत्र में वृद्धि करना है। इस भूमि क्षेत्र को वृद्धि करने का सबसे बड़ा कारण है जनसंख्या तेजी से बड़ना।

मतलब जैसे जैसे लोकसंख्या बढ़ती है वैसे ही उत्पादों की मांग भी बढ़ जाती है। इसलिए सभी बड़े व्यापारी इसका लाभ उठाने लगे है। वो इस वनों की कटाई का उद्योग करने लगे।

इस तरह पेड़ों की कटाई का लोगों ने व्यापार बना दिया। इसलिए, सरकार पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए जवाबी कार्रवाई कर रही है।

मृदा अपरदन

मृदा अपरदन मतलब मिट्टी की ऊपरी परत पेड़ बांध के रकते है। जो पेड़ों की वजह से वही दबी रहती थी। लेकिन अब पेड़ कटाई की वजह से पेड़ों को पूरी तरह से हटा दिया गया।

इसलिए मिट्टी की ऊपरी परत अब उसी जगह दबी नहीं रहती बल्कि हवा और पानी के जरिए वो वहासे बह जाती है। तब वहा की जगह पूरी तरह से सुखी पड जाती है।

इस मिट्टी अपरदन की वजह से भूस्खलन जैसी समस्याए उत्पन्न हो जाती है। बारिश के मौसम में किसी दिन वर्षा ज्यादा होने के कारण जब बाड़ आती है तो पूरी तरह से खाली इलाकों में उस बाड़ को रोखने के लिए कोई जंगल नहीं होते है। तब हम लोगों को ही नुकसान होता है।

ग्लोबल वार्मिंग

ग्लोबल वार्मिंग अपनी धरती की वो आपदा है जो पर्यावरण में हो रहे जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण है। जिसकी कारण पृथ्वी का पूरा पर्यावरण आसंतुलित हो रहा है।

इस आसंतुलन के कारण सभी मौसमों मे बदलाव आ रहा है। इसी ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अपने धरती का तापमान हर दिन बड़ता चला जा रहा है।

इसके बाद बर्फीले भागों में सालों से जमे हुए बरफ के पहाड़ जिसे हम हिमनग भी कहते है। वो धीरे धीरे पिघलने लगे है। इन सभी का कारण है वनों की कटाई जो हद से भी हो रही है।

जल चक्र पर प्रभाव

पेड़ हमेशा मिट्टी का पानी अपने अंदर सोख लेते है। इसलिए जहा वनों की संख्या ज्यादा होती है वहा वातावरण हमेशा शुद्ध और ठंड रहता है।

पेड़ों के इसी ठंड वातावरण की वजह से बारिश के मौसम के समय वहा बादल बहुत ज्यादा बनते है। लेकिन इस प्रकार इनके कटने से वातावरण में पानी की दर कम हो रही है।

इसलिए बादल नहीं बन रहे हैं। इसी कारण खेती में उचिल बारिश नहीं होती। इसलिए यह अप्रत्यक्ष रूप से केवल मनुष्यों को प्रभावित कर रहा है।

निष्कर्ष 

पूरी दुनिया में बड़ते हुए पेड़ कटाई को बहुत जल्द रोख लगानी होगी। नहीं तो एक दिन ऐसा आएगा की, इस बड़ते हुए ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पृथ्वी का तापमान बहुत बड़ रहा है। जिससे पूरी धरती एक दिन नष्ट हो सकती है। इसलिए पेड़ बचाओ, जीवन बचाओ।

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