प्राकृतिक आपदा पर निबंध हिंदी में (Essay on natural disaster in hindi)

प्राकृतिक आपदा मतलब वो आपदा जो पूरी तरह नैसर्गिक होती है। ये प्राकृतिक आपदा कभी भी आ सकती है। प्राकृतिक आपदा को आने का कोई समय नहीं रहता।

वो कभी भी उत्पन्न हो सकती है। इस प्राकृतिक आपदाओं में कई सारे प्रकार के आपदाएँ शामिल है। जैसे की ज्वालामुखी, भूकंप, सूनामी और बहुत सारी ऐसी आपदाएँ जो पूरी तरह से प्राकृतिक है।

इन प्राकृतिक आपदाओं की वजह से नैसर्गिक संपत्ति और इस दुनिया के सभी जीवों को बहुत बड़ा खतरा होता है। जो पूरे पर्यावरण के काफी नुकसानकारक है। कई प्राणियों की इस प्राकृतिक आपदा की वजह से मृत्यु भी हो जाती है।

भूकंप

भूकंप एक ऐसी प्राकृतिक आपदा जो किसी भी समय और किसी भी जगह पर आ सकती है। भूकंप कब आता है? और कितनी देर में आता है? इसके बारे में किसी को कोई खबर नहीं रहती है।

लेकिन जब भी भूकंप आता है। तब वो सभी जीवों के लिए और प्राकृतिक संसाधनों के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक साबित होता है। ये भूकंप तब होते है जब धरती के अंदर बड़े पत्थरों के प्लेटों का आपस में घर्षण होता है।

तब उस घर्षण की वजह से धरती की सतह हिलने लगती है। सभी भूकंप एक जैसे नहीं होते है। उनमे से कुछ भूकंप की तीव्रता बहुत कम होती है। तो कुछ भूकंप इतने शक्तिशाली होते है की, उसके वजह से बहुत विनाशकारी नुकसान होता है।

भूस्खलन और सुनामी का कारण

पृथ्वी पर उत्पन्न होने वाले बड़े तीव्रता वाले भूकंप ही भूस्खलन और सूनामी का कारण बन जाते है। इन भूकंपों की वजह से जब भूस्खलन और सूनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएँ आती है, तब बहुत ज्यादा मात्रा में नुकसान होता है।

इनमे वित्त हानी और जीवित हानी दोनों प्रकार से हानी बहुत ज्यादा मात्रा में होती है। भूस्खलन की वजह से पहाड़ की विशाल चट्टानें बहुत तेजी से नीचे की ओर गिरती है।

जिसकी वजह से ज्यादा मात्रा में प्राकृतिक और मानव निर्मित संपत्ति को नुकसान होता है। उसके बाद उस नुकसान से उभरने के लिए सभी लोगों को कई सालों लगते है।

हिमस्खलन

हिमस्खलन वो प्राकृतिक आपदा है, जो बर्फीली इलाकों में आती है। ये आपदा भी भूस्खलन की तरह होती है। इसमे अगर किसी बर्फीले पहाड़ पर बर्फ ज्यादा जम जाता है तो वहा की जगह भारी बन जाती है।

तब वो बर्फ पूरी तरह से टूटने लगती है। वो बर्फ टूटने की वजह से पहाड़ के नीचे की ओर आती है। जिसकी वजह इस आपदा के सामने जो भी चीज आती है। उसका पूरी तरह से नुकसान हो जाता है।

इस हिमस्खलन का सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को होता है, जो लोग बर्फ से भरे पहाड़ी इलाकों पर रहते है। जहा हिमस्खलन की सबसे ज्यादा समस्या होती है।

सूनामी

जैसे धरती पर भूकंप आते है, वैसे ही समुद्रों के नीचे भी भूकंप आते है। कभी कभी वो भूकंप इतने तेज होते है की, समुद्रों में बहुत बड़ी लहरे बन जाती है।

ये लहरे इतनी बड़ी और तेज होती है, जिस कारण बहुत ज्यादा मात्रा में प्राकृतिक और जीवित हानी होती है। जो हम सभी के लिए बहुत बड़ा नुकसान है।

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निष्कर्ष

ऐसे ही कई सारी प्राकृतिक आपदाएँ इस दुनिया में होती रहती है। जो हम सभी के लिए बहुत ज्यादा मात्रा में हानिकारक है। जिसे हम कभी रोख तो नहीं सकते है लेकिन इससे होने वाले नुकसान को हम जरूर कम कर सकते है। जिसके लिए हम सभी को और सरकार को कोई ना कोई कदम उठाने होंगे। जिससे इन प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान कम हो सके।