पेटीएम कंपनी के फाउंडर विजय शेखर शर्मा की जीवनी हिंदी मे

आज अपने भारत देश मे कैशलेश व्यवहार ज्यादा चल रहा है। इसलिए अपने जेब मे रखने वाले पर्स मे ज्यादा पैसा संभाल के रखने की भी परेशानी नहीं है।

मतलब पहले के समय मे जब हम सभी लोग कोई भी चीज खरीदने जाते थे, तो बहुत सारा पैसा साथ मे लेके जाना पड़ता था।

लेकिन आज के समय मे हम लोग पेटीएम जैसे ऐप्लकैशन के मदत से कोई भी चीज के बदले मे उस चीज की कीमत हम लोग बस दुकान मे रखे हुए पेटीएम बारकोड पर स्कैन करने से पैसा बैंक से ही ऑनलाइन पे हो जाता है। आज हम इस लेख मे यही पेटीएम बनाने वाले के बारेमें जानेंगे।

पेटीएम एक भारतीय कंपनी

पेटीएम कंपनी जिसकी वजह से हम सभी लोगों का पैसों का लेन देन का कामकाज बहुत ज्यादा आसान हो गया। ये कंपनी और कोई नहीं बल्कि अपने भारत देश की ही है।

जो पूरी तरह से अपने भारत देश मे ही बनी हुई है। ये कंपनी विजय शेखर शर्मा नाम की एक भारतीय व्यक्ति ने बनाई थी। जिसकी शुरुवात साल 2010 से हुई थी।

ये कंपनी भारत मे उत्तर प्रदेश राज्य मे स्थित नोयडा नाम के शहर मे स्थापित हुई थी।

ई कॉमर्स कंपनी

भारतीय कंपनी पेटीएम एक ई कॉमर्स कंपनी है। जिससे हम लोग पैसों का ऑनलाइन लेन देन कर सकते है। ये कंपनी सुरुवात मे सिर्फ मोबाईल के रिचार्ज और डी.टी.एच सेवाओं का ऑनलाइन रिचार्ज करती थी। तब इस कंपनी का शुरुवाती दौर था।

उसके बाद ये कंपनी आगे चलकर कुछ साल बाद गैस का बिल भरने लागि थी, बिजली का बिल भरने लगी थी और बहुत सारी पोर्टल की रिचार्जिंग और बिल भुगतान के काम करने लगी थी। साल 2012 मे इस कंपनी ने फ्लिपकार्ड, स्नैपडील और ऐमज़ान जैसे कंपनी की तरह उत्पादनों को ऑनलाइन उपलब्ध करने लगी थी।

उसके बाद कुछ साल बाद मतलब करीब साल 2015 तक इस कंपनी ने बस और बहुत सारी यात्रा वाहनों की टिकट बुकिंग का काम सुरू कर दिया। इस तरह ये कंपनी अपने भारत देश की एक लोकप्रिय कंपनी बन गई।

विजय शेखर शर्मा का जीवन

पेटीएम कंपनी के फाउंडर विजय शेखर शर्मा शुरुवात मे कोई आमिर आदमी नहीं थे, बल्कि एक मध्यम वर्गीय परिवार मे जन्मे थे। इनके पिता एक स्कूल मे शिक्षक थे।

इनकी शुरुवाती पढ़ाई एक हिंदी मीडियम स्कूल में हुई थी। विजय अपने क्लास मे हमेशा पहले क्रमांक पे आते थे। आगे चलकर उन्होंने दिल्ली के इंजीनियरिंग कॉलेज मे अड्मिशन लिया था।

लेकिन वो हिंदी स्कूल से होनेके के कारण उनको कॉलेज मे इंग्लिश के कमजोरी की मुश्किल जेलनी पड़ी थी। लेकिन आगे चलकर उन्होंने अपनी इस मुश्किल को खुद के दम पर पूरी तरह से खत्म कर दिया था।

खाली समय का उपयोग

अपनी अंग्रेजी भाषा की कमजोरी को चलते उनको इंजीनियरिंग कॉलेज सीखने मे बहुत ज्यादा दिक्कते आती थी। इसलिए वो कॉलेज मे ज्यादा नहीं जाते थे।

इसलिए उनके पास बहुत ज्यादा खाली समय था। इस खाली समय मे वो ज्यादा इंग्लिश सीखने मे बीता देते थे और इंटरनेट पर बहुत सारी नई नई जानकारी लेने मे बीता देते थे। तब उन्होंने yahoo नाम की सोशल नेटवर्किंग साइट के फाउन्डर सबीर भाटिया के बारे मे जाना तो वो सबीर भाटिया की जीवनी से प्रभावित हो गए थे।

तब उनको भी सबीर भाटिया की तरह कुछ बडा करने का मन मे आया और उन्होंने उस दिन से कोडिंग के बारे में सिखा। उसके बाद आगे चलकर उन्होंने कोडिंग की मदत से खुदकी कंटेन्ट मेनेजमेंट सीस्टम बनाई थी।

संघर्ष से सफलता की शुरुवात

आगे चलकर उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर एक कंपनी की स्थापना की थी, जिसका नाम XS था। लेकिन साल 1999 मे इसी कंपनी को एक अमेरिकन कंपनी लोटस इंटरवर्क नाम के एक कंपनी को बेच दिया था। इसके बाद इन्होंने One97 नाम की एक कंपनी की स्थापना की थी। इस कंपनी ने विजय ने अपनी सारी जमापूँजी खर्च कर डाली थी। लेकिन कुछ कारणों की वजह से उनको ये कंपनी भी बंद करनी पड़ी थी। ये उनके लिए वो समय था जब वो सिर्फ दो कप चाय पर ही पूरा दिन निकाल देते थे।

लेकिन कहते है ना कोई भी व्यक्ति अपना काम पूरी लगन से करता है तो उसको सफलता जरूर मिलती है। ऐसे ही विजय शेखर शर्मा के साथ हुआ था। उन्होंने इतनी सारी मुसीबतों के बाद पेटीएम कंपनी की स्थापना की। जो आज पूरे भारत देश मे ऑनलाइन पेमेंट के सबसे ज्यादा मशहूर कंपनी है। लेकिन ये लोकप्रियता इस कंपनी को तब मिली थी जब अपने देश मे नोटबंधी की गई थी। क्योंकि तबसे ये कंपनी पूरे भारत देश मे ऑनलाइन पेमेंट साइट मे सबसे मशहूर हो गई और आज पूरे भारत देश मे इस कंपनी का 15000 करोड़ से भी ज्यादा का कारोबार फैला हुआ है।

इसलिए आज पेटीएम कंपनी के फाउंडर विजय शेखर शर्मा को भारत देश के टॉप 40 हॉटेस्ट बीजिनेस लीडर के रुप मे चुना गया है। इस तरह विजय शेखर शर्मा एक सफल बीजिनेस मेन बन गए। “ये वही इंसान है जिसने करोड़ों रुपयों के कंपनी के सपने तब देखे जब उनके पास चाय पीने के लिए 10 रुपए भी नहीं थे।“

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