कोयल पर निबंध (Koyal Bird Essay in Hindi)

प्रस्तावना

कोयल एक वो पक्षी है, जिसको पूरी दुनिया मे उसकी आवाज के लिए जाना जाता है। इस पक्षी की आवाज सुनने मे इतनी मधुर होती है की इतनी मधुर आवाज बाकी किसी भी पक्षी या प्राणी मे नहीं होती है।

इस पक्षी का रंग बहुत ज्यादा काला होता है। इसलिए वो दिखने मे भी बिल्कुल सुंदर नहीं दिखता है। लेकिन ये पक्षी अपने रुप के वजह से नहीं बल्कि अपनी मीठी आवाज की वजह से पूरी दुनिया मे लोकप्रिय है।

ये पक्षी ज्यादातर बसंत ऋतु मे पेड़पर अपनी मीठी आवाज से गाते हुए दिखाई देते है। इस पक्षी की आवाज की वजह से ये बसंत ऋतु और भी ज्यादा खिलने लगता है।

कोयल पक्षी के प्रकार

इस दुनिया मे पैदा हुए हर जीव के दो प्रकार होते है। उसमे नर और मादा ये दो प्रकार होते है। इसके बिना पूरी दुनिया आगे नहीं चल सकती वैसे ही कोयल मे भी दो प्रकार होते है। उसमे से एक नर होता है और दूसरी मादा होती है। लेकिन इन दोनों मे बहुत फरक होता है।

जो कोयल नर होता है, वो रंग के तुलना मे मादा कोयल से बहुत ज्यादा काला होता है। लेकिन दोनों के आँखे लाल होती है। जो कोयल नर होता है, उसकी आवाज मादा कोयल से बहुत ज्यादा सुरीली होती है।

कोयल पक्षी का निवास स्थान

इसकी कई सारी प्रजातियाँ इस दुनिया मे मौजूद है, इसलिए कोयल पक्षी कई सारे देशों मे पाया जाता है। लेकिन इस पक्षी की प्रजाति ज्यादा तर भारत मे पाई जाती है।

ये पक्षी पूरे भारत मे पाए जाते है, लेकिन ये पक्षी ज्यादातर बसंत ऋतु मे ज्यादा पाए जाते है। क्योंकि ये मौसम इस पक्षी का पसंदीदा मौसम है।जब कोयल इस मौसम मे अपनी सुरुली आवाज निकालते है। तो उस समय वहा का वातावरण इस आवाज से पूरी तरह खिल उठता है।

कोयल एक शर्मिला पक्षी

कोयल एक ऐसा पक्षी होता है जो बहुत ज्यादा शर्मिला होता है। उसको सभी पक्षियों की तरह खुले मे खुदकी आवाज निकालने मे बहुत लज्जा आती है।

इसलिए ये पक्षी किसी भी पेड के शाखाओं मे पत्तों के पीछे छिपकर अपनी सुरीली आवाज निकलता है। जिससे वहाका वातावरण खिल उठता है।

इस पक्षी की आवाज मीठी होने के कारण वो अपनी आवाज से सबका मन अपनी ओर खींच लेता है। इसलिए ये पक्षी भले ही शर्मिला होता है, लेकिन इसकी मीठी आवाज इस पक्षी के शर्मीले स्वभाव को भुला देती है।

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कोयल के बच्चे

हम सभी को पता है कि, कोयल और कौवे मे बहुत बडी दुश्मनी होती है। क्योंकि इसमे हमेशा कोयल कौवे को धोखा देती है। जब कोयल अंडे देती है, तो वो अपने अंडे कौवे के गैर मौजूदगी मे उसके घोंसले मे उसके अंडे के साथ अपने अंडे रख देती है।

कौवे को ये सब पता न होने के कारण उस अंडे को भी वो अपना अंडा समजकर उसे सभालता है। जब बच्चे अंडे से बाहर आते है, तब कोयल के और कौवे के बच्चे एक जैसे ही दिखते है।

इसलिए कौवे कोयल के बच्चे को भी अपना बच्चा समजकर संभालता है। उसके बाद जैसे ही कोयल के बच्चे थोडे बडे होते है तब कोयल फिरसे धोके से अपने बच्चों को वहासे भगा के लेके जाती है।

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