किंगफिशर पर निबंध हिंदी मे (Kingfisher Essay in Hindi)

प्रस्तावना

किंगफिशर आमतौर पर चमकीले रंग के पक्षी होते हैं जो अक्सर अपने भोजन के लिए मछली खाते हैं। पूरी दुनिया में लगभग 90 तरह के किंगफिशर हैं। इनमें से अधिकांश नदियों या झीलों के पास गर्म क्षेत्रों में रहते हैं।

किंगफिशर में प्लंप बॉडीज होती हैं जो लगभग 4 से 18 इंच लंबी होती हैं। उनके पंख कई रंगों में आते हैं। कई किंगफिशर की पीठ पर नीले पंख और उनके पेट पर लाल या सफेद पंख होते हैं।

कुछ के सिर के ऊपर एक पंख, या उल्टा पंख होता है। एक किंगफिशर की छोटी पूंछ पक्षी को पानी के नीचे होने पर आसानी से मुड़ने देती है। डैगर जैसा बिल मछलियों, कीड़ों और अन्य खाद्य पदार्थों के लिए उपयोगी है।

किंगफिशर की विशेषता

किंगफिशर मछली को पानी में डुबोकर शिकार करते हैं। कभी-कभी वे छिपकली और कीड़े के लिए जमीन पर शिकार करते हैं। किंगफिशर हवा में एक दूसरे का पीछा करने और हमला करने के लिए भी जाने जाते हैं। किंगफिशर अपना समय अकेले व्यतीत करते हैं जब तक कि वह संभोग करने का समय न हो।

संभोग के मौसम के दौरान, पक्षी अपने अंडे के लिए घोंसले का निर्माण करने के लिए जोड़ी बनाते हैं। वे पेड़ों के खोखलों में घोंसले बनाते हैं या धरती के किनारे सुरंग खोदते हैं। अंडे की हैच के बाद, माता-पिता अपने युवा को एक साथ उठाते हैं। जब बच्चे काफी बूढ़े हो जाते हैं, तो माता-पिता फिर से अपने आप चले जाते हैं। किंगफिशर 20 साल तक जीवित रह सकते हैं।

किंगफिशर पक्षी का वर्णन

किंगफिशर पक्षी एक छोटे आकार का पक्षी होता है। उसका रंग चमकीला होता है। इसलिए वो दिखने मे छोटा होने के बावजुद भी बहुत सुंदर दिखता है।

इस पक्षी का सिर बडा होता है। इसकी चोंच लंबी और नुकीली होती है। इसके पैर बहुत छोटे है। इस पक्षी के बहुत सारे जातियो मे चमकिले रंग के पंख होते है।

ये पक्षी ज्यादातर उष्णकटिबंधीय जगह पर पाये जाते है। किंगफिशर पक्षी का खाना मछली होता है। इसलिए वो हमेशा मछली का शिकार करते रहते है। ये पक्षी भी बाकी पक्षीयों की तरह घोसले मे ही रहते है।

किंगफिशर पक्षी के प्रजातियां

इस पक्षी की 90 से ज्यादा प्रजातियां है। लेकिन इस पक्षी की सभी प्रजातियां आकार मे छोटी होती है। जो सभी देशो मे कही ना कही मौजुद होती है।

अपने भारत देश मे भी इसकी कही सारी प्रजातियां दीखाई देती है। इस पक्षी के अलग-अलग प्रजातियां होती है और उनके नाम भी अलग होते है।

जैसे की जो किंगफिशर हमेशा नदी मे शिकार करते हूए दीखते है तो उनको एल्सिडाइन्स के नाम से जाना जाता है और जो प्रजातियां हमेशा जंगल मे रहते है उनको हैल्सियोनिडी कहते है।

किंगफिशर पक्षी का निवासस्थान

इस पक्षी को अपने देश मे राम चिरैया के नाम से भी जाना जाता है। ये किंगफिशर पक्षी भी बाकी पक्षीयों की तरह घोसलो मे निवास करते है।

लेकिन इनके घोसले ज्यादातर नदी या फिर समुद्र के आस पास के पेड़ों पर दीखाई देते है। इसका कारण यही है की उनका शिकार मछली होने के कारण उनका घोसला पाणी के क्षेत्र के आसपास होता है।

वो हमेशा पेड के ज्यादा ऊचाई पर अपनी नुचिली चोच से सुरंग खोदके उसमे रहा करते है। पाणी के क्षेत्र के पास घोसला बनाने से उनको मछली पकडणे मे आसानी रहती है।

किंगफिशर पक्षी की उत्पत्ति

आज के समय मे इस पक्षी की ज्यादातर प्रजातियां ऑस्ट्रेलिया मे पाये जाती है। इसलिए ऐसा माना जाता है की, इस पक्षी की उत्पत्ति भी ऑस्ट्रेलिया मे ही हुई थी।

लेकिन संशोधन के अनुसार इस पक्षी की उत्पत्ति 40 मिलियन साल पहले जर्मनी मे हुई थी, क्योंकि जर्मन मे कई सारे क्षेत्र मे इसके जीवाश्म पाये गये थे। इसलिए संशोधन के अनुसार इस पक्षी की उत्पत्ति सबसे पहले जर्मन मे हुई थी। उसके बाद दुनिया के कई सारे देशो मे वो फैल गये।

किंगफिशर पक्षी का आहार

इस पक्षी का सबसे प्रमुख आहार मछली होता है। लेकिन इस पक्षी की सभी प्रजातियां मछली नही खाती है। वो सिर्फ पाणी के क्षेत्र के आसपास रहने वाली प्रजातियां ही मछली का शिकार करते है।

उनमे कई सारी प्रजातियां ज्यादातर जंगल मे राहती है। वो ज्यादातर मेंढक, पेड पर रहने वाले किडे- मकडिया और सांपों का शिकार करते है।लेकिन उनमे से ज्यादातर पाणी के क्षेत्र के आसपास रहने वाली जो मछली का शिकार किया करते है। वो सबसे लोकप्रिय प्रजाति है।

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