कल्पना चावला पर निबंध (Essay on Kalpana Chawla in Hindi)

कल्पना चावला यह अपने भारत देश की पहली अंतरिक्षयात्री थी। कल्पना चावला ने अपने भारत देश का वो सपना पूरा किया था, जो हर भारतीय व्यक्ति देखता था। वो सपना है खुले आसमान में पक्षियों की उड़ना, जो कल्पना चावला ने पहली बार पूरा किया था। कल्पना चावला अपने बचपन से ही आसमान में उड़ते विमान में रूचि रखती थी इसलिए उसने बड़े होने के बाद वैमानिकी इंजीनियरिंग ले ली।

जिससे वो आगे चलकर एक सफल अंतरिक्षयात्री बन गयी और अपने जीवन में सफल हो गयी। कल्पना चावला यह बहुत ज्यादा जिद्दी और अपने लक्ष्य के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करने वाली व्यक्ति थी। स्कूल में उसको विज्ञानं विषय में बहुत ज्यादा रूचि थी। वो हर समय अंतरिक्ष में जाने के सपने देखती थी। इसलिए ये सपना सच करने के लिए उसने उस सपने को अपना लक्ष्य बना दिया और इस लक्ष्य को पाने के लिए कल्पना पूरी लगन के साथ पढाई में मेहनत करने लगी।

एक अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी होती है, क्योंकि यह क्षेत्र बहुत ज्यादा कठिन क्षेत्र होता है। जहा अपनी ज़िंदगी बिताना भी बहुत ज्यादा कठिन होता है। ये जानने के बावजूद भी कल्पना अपने लक्ष्य से कभी भी पीछे नहीं हटी। इसके लिए उसको अपने माता पिता ने भी प्रोत्साहित किया। ताकि उसकी कभी भी हिम्मत न टूटे।

कल्पना चावला का परिचय और पढाई

अंतरिक्षयात्री कल्पना चावला का जन्म अपने भारत देश का राज्य हरियाणा के करनाल शहर में हुआ था। कल्पना चावला की स्कूल की पढाई वहाके एक स्थानीय स्कूल में हुई। आगे चलकर स्कूल की पढाई पूरी होने के बाद कल्पना ने अपनी ग्रेजुएशन की पढाई पूरी करने के लिए पंजाब विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। वहा उसने इंजीनियरिंग में एयरोनॉटिकल विभाग में प्रवेश लिया। उस विभाग में कल्पना चावला सबसे बेहतर छात्र थी। क्योंकि उसका सपना ही एक अंतरिक्षयात्री बनना था।

इसलिए उसने ग्रेजुएशन की पढाई पूरी करने के बाद उसके आगे की पढाई पूरी करने के लिए विदेश चली गयी। वहा उसने टेक्सास विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। जहा उसने अपनी पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढाई भी पूरी की। उसके बाद उसने डॉक्टरेट की उपाधि हासिल करने के लिए कोलोराडो विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। उसके बाद उसने अपना करियर नासा के एम्स रिसर्च सेंटर से शुरू किया।

अंतरिक्ष यात्री बनने तक का सफर

अपने करियर से जुडी सभी प्रकार की पढाई पूरी करने के बाद वो साल १९९४ में नासा स्पेस रिसर्च सेंटर में एक अंतरिक्ष यात्री बन गई। आगे चलकर उसको नासा में अंतरिक्ष क्षेत्र में जाने के लिए चुना गया था। जिस कारण कल्पना चावला अपने सपने के बहुत ज्यादा करीब पोहोच गयी थी। जहा उसका सपना था की, वह एक दिन चाँद पर उतरेगी। जिसके लिए उसने इतनी कड़ी मेहनत ली थी।

कल्पना चावला का पहला अंतरिक्ष क्षेत्र में जाने का मिशन १९ नवंबर १९९४ को था। जब वह अपने ६ अंतरिक्ष क्षेत्र में जाने वाले सदस्यों के साथ कोलंबिया के अंतरिक्ष यान एसटीएस -८७ में चली गयी। अंतरिक्ष में जाने के बाद वह 375 घंटे तक जीवित रही। जहा उसने तरिक्ष में 6.5 मिलियन मील की दूरी तय की। लेकिन पृथ्वी पर वापस आते समय यान में कुछ तकनिकी खराबी आ गयी।

जिससे उस यान का पृथ्वी पर आने से पहले ही विस्फोट हो गया। जिसमे कल्पना चावला के साथ अन्य ६ सदस्यों का जीवन समाप्त हो गया। इस तरह कल्पना चावला के जीवन समाप्ति के साथ साथ उसका सपना भी हमेशा के लिए अधूरा रह गया। उसकी दुर्दैवी मृत्यु की वजह से उसका करियर भी उम्मीद से पहले खत्म हो गया।

निष्कर्ष

कल्पना चावला की उस मिशन में मृत्यु हो गयी, जिस कारन सभी भारतीयों को बहुत दुःख हुआ। लेकिन कल्पना चावला मृत्यु के बावजूद भी अमर हो गयी। कल्पना चावला सभी भारतीय महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गयी। जिससे भारतीय महिलाओं में खुदके जिद पर बड़ा होने की सोच निर्माण हो गयी। कल्पना चावला के जीवन से हमें ये भी सिखने को मिलता है की, हमें सीमाओं के भीतर खुद को सीमित नहीं करना चाहिए, बल्कि हमें जीवन को अपने सपनों को पूरा करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए।

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