इंडिया गेट पर निबंध (Essay on India Gate in Hindi)

इंडिया गेट का निर्माण प्रथम विश्व युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों को सम्मानित करने के लिए निर्माण किया गया था। जिसे अपने भारत देश की एक सुंदर वास्तुकला के रूप में देखा जाता है। जो आज भी उतनाही आकर्षक दिखता है, जितना पहले था।

इंडिया गेट का उद्घाटन पहली बार साल 1931 में किया गया था। यह वास्तुकला अपने भारत देश के उन हजारों – लाखों सैनिकों की याद दिलाती है, जो प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए थे। इसलिए आज भी जब कोई दिल्ली जाता है, तो वो इंडिया गेट जरूर देखने जाता है।

इंडिया गेट दिल्ली का एक अविभाज्य और महत्वपूर्ण हिस्सा है। जो प्रमुख पर्यटक आकर्षण भी है। वहाके स्थानीय लोगों के साथ-साथ दिल्ली घूमने आने वाले ज्यादातर पर्यटक साल भर इस जगह पर घूमते हैं। दिल्ली के कुछ स्थानीय लोगों के लिए इंडिया गेट एक पिकनिक स्थल है।

इंडिया गेट की सुंदरता

इंडिया गेट तक पहुंचना बहुत आसान है, जो भारत देश के केंद्र में स्थित है। सर्दियों के मौसम में लोग यहाँ अपने दोस्तों और परिवारों के साथ महत्वपूर्ण समय बिताते है।

गर्मी के महीनों के दौरान यहाका नजारा और भी अच्छा लगता है। इस जगह की यात्रा के लिए सबसे खूबसूरत समय रात में होता है जब यह रोशनी से पूरी तरह से रोशन होता है।

अद्भुत वास्तुशिल्प रचना

अपना भारत देश पूरी दुनिया में एक अद्भुत वास्तुशिल्प रचनाओं के रूप में प्रसिद्ध है। उसी वास्तुशिल्प रचनाओं में से एक है इंडिया गेट। जिसे बनाने में करीब 10 साल लगे थे।

जो एडविन लुटियंस की देखरेख में बनाया गया था। वह शाही युद्ध कब्र आयोग का सदस्य था और दिसंबर 1917 में इसका गठन किया गया था।

एडविन लुटियंस युद्ध के स्मारक और शाही कब्रों की अद्भुत रचना करने में माहिर था। इसलिए उसे भारत में “इंडिया गेट” जैसे युद्ध स्मारक को डिजाइन करने का यह कार्य दिया गया था।

इंडिया गेट का वर्णन

इंडिया गेट दिल्ली के बीचोबीच स्थित है और 42 मीटर लंबी एक इमारत है। जिसकी चौड़ाई 9.1 मीटर है। इंडिया गेट मुख्य रूप से लाल और पीले बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट से बना है।

इंडिया गेट की स्थापत्य शैली विजयी मेहराब पर आधारित है। इंडिया गेट के शीर्ष पर एक गुंबददार कटोरी है। इसे वर्षगांठ और राष्ट्रीय त्योहारों जैसे महत्वपूर्ण दिनों में जलते हुए रोशनी के साथ फिल्माने के उद्देश्य से बनाया गया है।

साथ ही, इंडिया गेट का वास्तुशिल्प आर्क डी ट्रायम्फ डे लेटोली पर आधारित है। यह पेरिस में सबसे प्रसिद्ध स्मारकों में से एक माना जाता है।

अमर जवान ज्योति

पहले विश्व युद्ध के दौरान मारे गए ब्रिटिश भारतीय के सैनिकों को याद करने के लिए यह इंडिया गेट बनाया गया था, वो एक छोटी सी इमारत थी। जो साल 1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान अपनी जान गंवाने वाले सैनिकों के सम्मान में बनाई गई थी।

इसलिए अमर जवान ज्योति को भारत द्वार का एक अभिन्न अंग माना जाता है। अमर जवान ज्योति को काले पैडल के रूप में देखा जाता है। जिसमें शीर्ष पर काले हेलमेट के साथ कवर किया गया राइफल होता है।

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